हबीब तनवीर : कारतूस — भावार्थ, प्रसंग, विस्तृत व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ (Habib Tanvir : Kartoos, Bhawarth, Prasang, Vyakhya, Kathin Shabdo ke Arth)
हबीब तनवीर — कारतूस (Habib Tanvir — Kartoos) Class 10 Hindi Sparsh मूल पाठ एवं व्याख्या दृश्य 1 — गोरखपुर के जंगल में कर्नल और लेफ्टिनेंट 📜 मूल पाठ पात्र — कर्नल , लेफ्टिनेंट , सिपाही , सवार अवधि — 5 मिनट जमाना — सन् 1799 समय — रात का स्थान — गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिज़ के खेमे का अंदरूनी हिस्सा। ( दो अंग्रेज़ बैठे बातें कर रहे हैं , कर्नल कालिज़ और एक लेफ्टिनेंट खेमे के बाहर हैं , चाँदनी छिटकी हुई है , अंदर लैम्प जल रहा है।) कर्नल — जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है। लेफ्टिनेंट — हँसते तो गए यहाँ खेमा डाले हुए सिपाही भी तंग आ गए हैं। ये वज़ीर अली आदमी है या भूत , हाथ ही नहीं लगता। कर्नल — उसके अफ़साने सुनने से तो रॉबिनहुड के कारनामे याद आ जाते हैं। अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ उसके दिल में किस कदर नफ़रत है। कोई पाँच महीने हुकूमत की होगी। मगर इस पाँच महीने में वो अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से बिलकुल पाक कर देने में तक़रीबन कामयाब हो गया था। लेफ्टिनेंट — कर्नल कालिज़ ये सआदत अली कौन है ? कर्नल — आसिफ़उद्दौला का भाई है। वज...