रविंद्र केलेकर — पतझर में टूटी पत्तियाँ (Ravindra Kelekar — Patjhar Mein Tootee Pattiyan) Class 10 Sparsh
रविंद्र केलेकर : जीवन-परिचय रविंद्र केलेकर ( 1925–2010) कोंकणी और मराठी के श्रेष्ठ लेखक एवं पत्रकार थे। उनका जन्म 7 मार्च 1925 को कोंकण क्षेत्र में हुआ था। छात्र जीवन से ही वे गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हो गए थे। केलेकर एक गांधीवादी चिंतक के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने लेखन में जन-जीवन से जुड़े विभिन्न पक्षों , मान्यताओं और व्यक्तिगत विचारों को देश तथा समाज के व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उनकी अनुभवजन्य टिप्पणियों में उनके मौलिक चिंतन के साथ-साथ मानवीय सत्य तक पहुँचने की सहज चेष्टा दिखाई देती है। साहित्यिक योगदान रविंद्र केलेकर ने मुख्य रूप से कोंकणी और मराठी भाषाओं में लेखन किया। उनकी रचनाएँ हिंदी और गुजराती में भी प्रकाशित हुईं। उन्होंने अनेक पुस्तकों का संपादन और अनुवाद भी किया। उनकी प्रमुख कृतियों में — कोंकणी: उजवाडाचे सूर , समिधा , सांगली , ओथांबे मराठी: कोंकणीचे राजकरण , जापान जसा दिसला हिंदी: पतझर में टूटी पत्तियाँ शामिल हैं। पुरस्कार एवं सम्मान रविंद्र केलेकर को गोवा कला अकादमी के साहित्य पुरस्कार सहित अनेक पुरस्क...