प्रहलाद अग्रवाल : तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र — भावार्थ, प्रसंग, विस्तृत व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ (Prahlad Agrawal : Teesri Kasam Ke Shilpkar Shailendra, Bhawarth, Prasang, Vyakhya, Kathin Shabdo ke Arth)
📖 प्रहलाद अग्रवाल — तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (Prahlad Agrawal - Teesri Kasam Ke Shilpkar Shailendra) Class 10 Hindi Sparsh 📖 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र लेखक — प्रहलाद अग्रवाल गद्यांश –1 : ‘ संगम ’ की सफलता से ‘ तीसरी कसम ’ तक 📜 मूल पाठ ‘ संगम ’ की अद्भुत सफलता ने राजकपूर में गहन आत्मविश्वास भर दिया और उसने एक साथ चार फ़िल्मों के निर्माण की घोषणा की —‘ मेरा नाम जोकर ’, ‘ अजंता ’, ‘ मैं और मेरा दोस्त ’ और ‘ सत्यम् शिवम् सुंदरम् ’! पर जब 1965 में राजकपूर ने ‘ मेरा नाम जोकर ’ का निर्माण आरंभ किया तब संभवतः उसने भी यह कल्पना नहीं की होगी कि इस फ़िल्म का एक ही भाग बनाने में छह वर्षों का समय लग जाएगा। इन छह वर्षों के अंतराल में राजकपूर द्वारा अभिनीत कई फ़िल्में प्रदर्शित हुईं , जिनमें सन् 1966 में प्रदर्शित कवि शैलेंद्र की ‘ तीसरी कसम ’ भी शामिल है। यह वह फ़िल्म है जिसमें राजकपूर ने अपने जीवन की सर्वोत्कृष्ट भूमिका अदा की। यही नहीं , ‘ तीसरी कसम ’ वह फ़िल्म है जिसने हिंदी साहित्य की एक अत्यंत मार्मिक कृति को सैल्यूलाइड ...