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भारत छोड़ो आंदोलन और भारत की आज़ादी (Quit India Movement and India's independence)

  भारत छोड़ो आंदोलन और भारत की आज़ादी (Quit India Movement and India's independence)   भारत छोड़ो आंदोलन ( Quit India Movement) 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू किया गया एक ऐतिहासिक आंदोलन था , जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन से तत्काल मुक्ति पाना था। इसे ' अगस्त क्रांति ' के नाम से भी जाना जाता है। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।             भारत छोड़ो आंदोलन: पृष्ठभूमि   1. द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव o     द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारतीय संसाधनों का उपयोग किया। o     भारतीय नेताओं और जनता को बिना विश्वास में लिए ही भारत को युद्ध में झोंक दिया गया। 2. क्रिप्स मिशन की विफलता o     ब्रिटिश सरकार ने सर स्टैफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा , लेकिन उनके प्रस्ताव अस्वीकार्य थे। o     भारतीय नेताओं को महसूस हुआ कि स्वतंत्रता के बिना कोई समझौता संभव नहीं। 3. गांधीजी ...

उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण (Liberalization, Globalization, and Privatization)

  उदारीकरण , वैश्वीकरण और निजीकरण ( Liberalization, Globalization, and Privatization)   उदारीकरण , वैश्वीकरण , और निजीकरण ( LPG) 1991 में भारत में आर्थिक सुधारों के तीन प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। इन सुधारों को भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने , अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भाग लेने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए लागू किया गया था। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।           उदारीकरण ( Liberalization) उदारीकरण का अर्थ उदारीकरण का अर्थ है सरकारी नियंत्रण को कम करके आर्थिक व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र बनाना। इसमें व्यापार , उद्योग और वित्तीय क्षेत्र में सरकार के हस्तक्षेप को घटाकर निजी उद्यमियों और विदेशी निवेशकों को बढ़ावा दिया जाता है। उदारीकरण का मुख्य उद्देश्य सरकारी नियम-कायदों को सरल बनाना। आर्थिक गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना। विदेशी निवेश आकर्षित करना। उदारीकरण के प्रभाव 1. विनियमन की समाप्ति लाइसेंस राज और कठोर सरकारी नियंत्रण को समाप्त किया गया ,...