लीलाधर मंडलोई — तताँरा-वामीरो कथा

 

लीलाधर मंडलोईतताँरा-वामीरो कथा (Leeladhar Mandloi — Tantara Vamiro Katha) Class 10 Hindi Sparsh


 

📖 तताँरा-वामीरो कथा

लेखक लीलाधर मंडलोई

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श

✍️ 1. लीलाधर मंडलोई : जीवन परिचय

लीलाधर मंडलोई का जन्म 1954 में छिंदवाड़ा ज़िले के एक छोटे से गाँव गुढ़ी में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा भोपाल और रायपुर में हुई। प्रसारण की उच्च शिक्षा के लिए उन्हें 1987 में कॉमनवेल्थ रिलेशंस ट्रस्ट, लंदन की ओर से आमंत्रित किया गया। इन दिनों वे प्रसार भारती दूरदर्शन के महानिदेशक का कार्यभार संभाल रहे हैं।

लीलाधर मंडलोई मूलतः कवि हैं। उनकी कविताओं में छत्तीसगढ़ अंचल की बोली, वहाँ की मिट्टी, लोकजीवन और जनजीवन का सजीव चित्रण दिखाई देता है। उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की जनजातियों पर भी लेखन किया है। उनके लेखन में समाज, संस्कृति और लोकजीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है।

वे केवल कविता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोककथा, लोकगीत, यात्रा-वृत्तांत, डायरी, मीडिया, रिपोर्ताज और आलोचना-लेखन में भी सक्रिय रहे हैं।

उनकी प्रमुख कृतियों में घर-घर घूम’, ‘रात-बिरात’, ‘मगर एक आवाज़’, ‘देखा-अनदेखाऔर काला पानी आदि उल्लेखनीय हैं। अपनी रचनात्मक प्रतिभा के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है।


 

📚 2. पाठ का परिचय

तताँरा-वामीरो कथा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के लोकजीवन से जुड़ी एक प्रसिद्ध प्रेमकथा है। कहानी में तताँरा और वामीरो के प्रेम, सामाजिक परंपराओं, रूढ़ियों और उनके दुखद परिणाम को प्रस्तुत किया गया है।

कथा के अनुसार तताँरा कार-निकोबार का एक साहसी, नेक और मददगार युवक था। वह अपनी अद्भुत तलवार के लिए प्रसिद्ध था। लोगों का विश्वास था कि उसकी तलवार में असाधारण दैवी शक्ति है।

एक दिन समुद्र किनारे उसे वामीरो नाम की युवती दिखाई देती है। दोनों के बीच प्रेम उत्पन्न हो जाता है, लेकिन उनके प्रेम के रास्ते में गाँव की परंपराएँ और सामाजिक रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं। वामीरो के गाँव से बाहर विवाह की अनुमति नहीं थी।

दोनों का प्रेम अंततः दुखद घटना में बदल जाता है। तताँरा और वामीरो के प्रेम तथा उनकी मृत्यु की स्मृति बाद में लोगों के लिए ऐसी प्रेरणा बनती है कि विवाह से संबंधित कठोर सामाजिक परंपराओं में परिवर्तन आने लगता है।


 

 

📖 तताँरा-वामीरो कथा

लेखक लीलाधर मंडलोई


 

📜 गद्यांश–1

तताँरा का परिचय

मूल पाठ

अंडमान द्वीपसमूह का अंतिम दक्षिणी द्वीप है लिटिल अंडमान। यह पोर्ट ब्लेयर से लगभग सौ किलोमीटर दूर स्थित है। इसके बाद निकोबार द्वीपसमूह की श्रृंखला आरंभ होती है जो निकोबारी जनजाति की आदि संस्कृति के केंद्र हैं। निकोबारी द्वीपसमूह का पहला प्रमुख द्वीप है कार-निकोबार जो लिटिल अंडमान से 96 कि.मी. दूर है। निकोबारियों का विश्वास है कि प्राचीन काल में ये दोनों द्वीप एक ही थे।

सदियों पूर्व, जब लिटिल अंडमान और कार-निकोबार आपस में जुड़े हुए थे तब वहाँ एक सुंदर-सा गाँव था। पास में एक सुंदर और शक्तिशाली युवक रहता था। उसका नाम था तताँरा। निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे। तताँरा एक नेक और मददगार व्यक्ति था। सदैव दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहता। अपने गाँववालों को ही नहीं, अपितु समुद्रद्वीपवासियों की सेवा करना अपना परम कर्तव्य समझता।

उसके नेक व्यक्तित्व का आज भी उसका आदर था। वह अपनी तत्परता के लिए प्रसिद्ध था। जो भी व्यक्ति किसी संकट में पड़ता था वह उसे स्मरण करता और वह भागा-भागा वहाँ पहुँच जाता। दूसरे गाँवों में भी पर्व-त्योहारों के समय उसे विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता। उसका व्यक्तित्व तो आकर्षक था ही, साथ ही आत्मीय स्वभाव की वजह से लोग उसके करीब रहना चाहते।

पारंपरिक पोशाक के साथ वह अपनी कमर में सदैव एक लकड़ी की तलवार बाँधे रखता था। यह तलवार अद्भुत ढंग से लकड़ी की बनी होने पर भी उसमें अद्भुत दैवीय शक्ति थी। तताँरा अपनी तलवार को कभी अलग न होने देता। उसका दूसरों के सामने उपयोग भी न करता। किंतु उसके चर्चित साहसिक कारनामों के कारण लोग-बाग तलवार में अद्भुत शक्ति का होना मानते थे। तताँरा की तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।

एक शाम तताँरा दिनभर के अथक परिश्रम के बाद समुद्र किनारे टहलने निकला पड़ा। सूरज समुद्र से लेने की तरह डूबने को था। समुद्र से उठी बयारें आ रही थीं। लहरियाँ चहचहाहटें शनेः-शनेः क्षीण होने को थीं। उसका मन शांत था। विचारमग्न तताँरा समुद्री बालू पर बैठकर सूरज की अंतिम रंग-बिरंगी किरणों को समुद्र पर निहारने लगा। तभी कहीं पास से उसे मधुर गीत गूँजता सुनाई दिया। गीत मानो बहता हुआ उसकी तरफ आ रहा हो। बीच-बीच में लहरों का संगीत सुनाई पड़ता था। गीत इतना सुस्पष्ट और प्रभावी था कि वह अपने-आप खिंचा चला गया। एक पल वह रुका और पुनः कदम बढ़ाया।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

द्वीपसमूह

अनेक द्वीपों का समूह

आदि संस्कृति

प्राचीन संस्कृति

श्रृंखला

क्रम से जुड़े हुए समूह

निकोबारी

निकोबार द्वीपसमूह में रहने वाली जनजाति

शक्तिशाली

बलवान

नेक

अच्छा, सज्जन

तत्पर

तैयार

परम कर्तव्य

सबसे बड़ा कर्तव्य

आत्मीय

अपनापन रखने वाला

पारंपरिक

परंपरा से संबंधित

दैवीय

ईश्वर से संबंधित

विलक्षण

असाधारण, अनोखा

अथक

बिना थके किया गया

बयार

हवा

विचारमग्न

विचारों में डूबा हुआ

बालू

रेत

सुस्पष्ट

बिल्कुल स्पष्ट

प्रभावी

असरदार


📌 प्रसंग

प्रस्तुत गद्यांश लीलाधर मंडलोई द्वारा रचित तताँरा-वामीरो कथा से लिया गया है। इसमें लेखक ने निकोबार द्वीपसमूह, वहाँ के जनजीवन तथा तताँरा के चरित्र का परिचय दिया है। साथ ही तताँरा के नेक, मददगार और साहसी व्यक्तित्व तथा उसकी रहस्यमयी तलवार का वर्णन किया गया है।


📝 सरल अर्थ

लेखक बताता है कि लिटिल अंडमान के बाद निकोबार द्वीपसमूह शुरू होता है। निकोबारियों की मान्यता थी कि प्राचीन समय में लिटिल अंडमान और कार-निकोबार एक ही द्वीप थे।

बहुत पहले वहाँ एक सुंदर गाँव था। उस गाँव में तताँरा नाम का एक सुंदर और शक्तिशाली युवक रहता था। वह बहुत नेक और मददगार था। वह केवल अपने गाँव के लोगों की ही नहीं, बल्कि दूसरे द्वीपों के लोगों की भी सहायता करता था।

किसी व्यक्ति पर संकट आने पर लोग तताँरा को याद करते और वह तुरंत उसकी सहायता के लिए पहुँच जाता। दूसरे गाँवों के लोग भी उसे अपने पर्व-त्योहारों में विशेष रूप से बुलाते थे। उसके आकर्षक व्यक्तित्व और आत्मीय स्वभाव के कारण लोग उसे बहुत पसंद करते थे।

तताँरा हमेशा अपनी कमर में लकड़ी की तलवार बाँधे रखता था। लोगों का विश्वास था कि उस साधारण दिखाई देने वाली लकड़ी की तलवार में अद्भुत दैवीय शक्ति थी। वह तलवार को अपने से कभी अलग नहीं करता था और दूसरों के सामने उसका प्रयोग भी नहीं करता था।

एक शाम दिनभर के परिश्रम के बाद तताँरा समुद्र के किनारे घूमने गया। सूर्य अस्त होने वाला था। समुद्र की हवाएँ और लहरों की आवाज़ वातावरण को शांत बना रही थीं। तभी उसे पास से एक मधुर गीत सुनाई दिया। उस गीत ने तताँरा को इतना आकर्षित किया कि वह उसकी ओर खिंचा चला गया।


💡 महत्वपूर्ण बातें

  • लिटिल अंडमान के बाद निकोबार द्वीपसमूह की शुरुआत होती है।
  • कार-निकोबार निकोबारी संस्कृति का प्रमुख केंद्र बताया गया है।
  • तताँरा एक सुंदर, शक्तिशाली, नेक और मददगार युवक था।
  • वह लोगों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता था।
  • तताँरा की लकड़ी की तलवार को लोग दैवीय शक्ति से युक्त मानते थे।
  • समुद्र किनारे उसे पहली बार मधुर गीत सुनाई देता है।
  • यही गीत आगे वामीरो से उसके मिलन का कारण बनता है।

 

📜 गद्यांश–2

तताँरा और वामीरो का प्रथम मिलन

मूल पाठ

गीत के स्वर बह रहे थे। वह विकल-सा उस तरफ बढ़ता गया। अंततः उसकी नजर एक युवती पर पड़ी जो हल्की हुई शाम के सौंदर्य में बेसुध, एकाएक समुद्र की देह पर डूबते आकर्षक रंगों को निहारता हुआ गीत गा रही थी। वह एक सुंदर गीत था।

उसे ज्ञात ही न हो सका कि कोई अनजाना युवक उसे निःशब्द ताके जा रहा है। एकाएक एक ऊँची लहर उठी और उसे भिगो गई। वह हड़बड़ाहट में गाना भूल गई। इसके पहले कि वह सामान्य हो पाती, उसने अपने कानों में गूँजती गंभीर आकर्षक आवाज सुनी।

तुमने एकाएक इतना मधुर गाना क्यों छोड़ दिया?” तताँरा ने विनम्रतापूर्वक कहा। अपने सामने एक सुंदर युवक को देखकर वह विस्मित हुई। उसके भीतर किसी कोमल भावना का संचार हुआ किंतु अपने संयत स्वर में उसने बेरुखी के साथ जवाब दिया।

पहले बताओ! तुम कौन हो, इस तरह मुझे घूरने और इस असंगत प्रश्न का कारण? अपने गाँव के अलावा किसी और गाँव के युवक के प्रश्नों का उत्तर देने को मैं बाध्य नहीं। यह तुम भी जानते हो।

तताँरा मानो सम्मोहित था। उसके कानों में युवती की आवाज ठीक से पहुँच न सकी। उसने पुनः विनय की, “तुमने गाना क्यों रोक दिया? गाओ न?”

युवती उखड़ती हुई झुँझलाई, अंततः उसने निश्चयपूर्वक एक बार पुनः लगभग विरोध करते हुए कड़े स्वर में कहा।

ढीठता की हद है। मैं जब से परिचय पूछ रही हूँ और तुम बस एक ही राग अलाप रहे हो। गीत गाओ-गीत गाओ, आखिर क्यों? क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम?”

इतना बोलकर वह जाने के लिए तेजी से मुड़ी। तताँरा को मानो कुछ होश आया। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। वह उसके सामने रोककर, लगभग गिड़गिड़ाने लगा।

मुझे माफ कर दो। जीवन में पहली बार मैं इस तरह विचलित हुआ हूँ। तुम्हें देखकर मेरी चेतना लुप्त हो गई थी। मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा। बस अपना नाम बता दो।

तताँरा ने विवशता में आग्रह किया। उसकी आँखें युवती के चेहरे पर केंद्रित थीं। उसके चेहरे पर सच्ची विनय थी।

वा... मी... रो...एक रस घोलती आवाज उसके कानों में पहुँची।

वामीरो... वामी... रो... वाह कितना सुंदर नाम है। कल भी आओगी न यहाँ?” तताँरा ने याचना भरे स्वर में कहा।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

विकल

बेचैन

बेसुध

बेहोशी जैसी अवस्था में, सुध-बुध खोए हुए

निहारना

ध्यान से देखना

अनजाना

अपरिचित

निःशब्द

बिना आवाज़ के

विस्मित

हैरान

कोमल भावना

प्रेम/स्नेह की भावना

संयत

नियंत्रित

बेरुखी

उदासीनता

असंगत

अनुचित, जिसका मेल न हो

बाध्य

मजबूर

सम्मोहित

मोहित

विनय

नम्र निवेदन

ढीठता

निर्लज्जता

विचलित

व्याकुल

विवशता

मजबूरी

याचना

विनती

रस घोलती

मधुर प्रभाव डालने वाली


📌 प्रसंग

इस गद्यांश में लेखक ने तताँरा और वामीरो की पहली मुलाकात का वर्णन किया है। तताँरा समुद्र के किनारे एक युवती को मधुर गीत गाते हुए देखता है। वह युवती वामीरो है।


📝 सरल अर्थ

समुद्र के किनारे तताँरा को एक मधुर गीत सुनाई देता है। वह गीत की ओर बढ़ता है और उसे एक सुंदर युवती दिखाई देती है। वह युवती समुद्र के सुंदर दृश्य को देखते हुए गीत गा रही थी।

तताँरा उसे चुपचाप देखने लगता है। तभी समुद्र की एक ऊँची लहर आती है और युवती को भिगो देती है। वह अचानक अपना गीत भूल जाती है। तभी तताँरा उससे पूछता है कि उसने इतना मधुर गीत क्यों रोक दिया।

युवती तताँरा को देखकर आश्चर्यचकित होती है और उससे पूछती है कि वह कौन है तथा उसे इस प्रकार क्यों देख रहा है। वह अपने गाँव की परंपरा का हवाला देते हुए कहती है कि उसे दूसरे गाँव के युवक के प्रश्नों का उत्तर देने की बाध्यता नहीं है।

तताँरा उस युवती के आकर्षण से इतना प्रभावित था कि उसकी बातें ठीक से सुन भी नहीं पाया। वह बार-बार उससे गीत गाने के लिए कहता है। युवती नाराज़ होकर उसे गाँव के नियम की याद दिलाती है।

जब युवती वहाँ से जाने लगती है तो तताँरा को अपनी गलती का एहसास होता है। वह उससे माफी माँगता है और केवल उसका नाम बताने का आग्रह करता है।

तब युवती अपना नाम बताती हैवामीरो

वामीरो का नाम सुनकर तताँरा बहुत प्रभावित होता है और उससे अगले दिन फिर वहाँ आने का आग्रह करता है।


💡 महत्वपूर्ण बातें

  • तताँरा पहली बार वामीरो को समुद्र किनारे देखता है।
  • वामीरो बहुत मधुर गीत गा रही थी।
  • तताँरा उसके सौंदर्य और आवाज़ से प्रभावित हो जाता है।
  • वामीरो अपने गाँव की परंपरा से परिचित थी।
  • तताँरा अपनी गलती स्वीकार कर वामीरो से माफी माँगता है।
  • पहली मुलाकात में ही दोनों के बीच आकर्षण उत्पन्न होता है।
  • वामीरो अपना नाम बताती है।

 

📜 गद्यांश–3

प्रेम की शुरुआत और प्रतीक्षा

मूल पाठ

नहीं... शायद... कभी नहीं।वामीरो ने अयत्नपूर्वक कहा और झटके से लपाती की तरफ़ मुड़ गई। पीछे तताँरा के बचा गूँज रहे थे।

वामीरो... मेरे नाम तातारा को कल में इसी चट्टान पर प्रतीक्षा करूँगा... तुम्हारी बाट जोहूँगा... जरूर आना...

वामीरो रुकी नहीं, भागती ही गई। तताँरा उसे जाते हुए निहारता रहा।

वामीरो घर पहुँचकर भीतर ही भीतर कुछ बेचैनी महसूस करने लगी। उसके भीतर तताँरा से मूक होने की एक लहर उठी थी। एक उत्सुकता थी। तताँरा बार-बार उसके मन के सामने आता था। उसकी आँखों में एक स्नेहिल आग्रह तैरता रहता। वामीरो ने तताँरा के बारे में कई कहानियाँ सुन रखी थीं। उसकी कल्पना में वह एक अद्भुत साहसी युवक था। किंतु वही तताँरा उसके सम्मुख एक अलग रूप में आया। सुंदर, बलिष्ठ किंतु बेहद शांत और भोला। उसका वास्तविक वर्णन कैसा ही था जैसा वह अपने जीवन-साथी के बारे में सोचती रही थी। किंतु एक दूसरे गाँव के युवक के साथ यह संबंध परंपरा के विरुद्ध था। अतः उसने उसे भूल जाना ही श्रेयकर समझा। किंतु यह असंभव जान पड़ा। तताँरा बार-बार उसकी आँखों के सामने था। निमिषभर पलक झपकती की तरह प्रतीक्षा में डूबी हुई।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

अयत्नपूर्वक

बिना विशेष प्रयास के

चट्टान

पत्थर की बड़ी शिला

बाट जोहना

प्रतीक्षा करना

बेचैनी

व्याकुलता

मूक

मौन

उत्सुकता

जानने की इच्छा

स्नेहिल

प्रेमपूर्ण

बलिष्ठ

मजबूत

भोला

सरल स्वभाव वाला

जीवन-साथी

पति/पत्नी

श्रेयकर

अधिक उचित

निमिषभर

बहुत थोड़े समय के लिए


📌 प्रसंग

इस गद्यांश में लेखक ने वामीरो के मन में तताँरा के प्रति उत्पन्न प्रेम और आकर्षण का वर्णन किया है। साथ ही उनके प्रेम के सामने उपस्थित सामाजिक परंपरा की बाधा को भी बताया गया है।


📝 सरल अर्थ

वामीरो तताँरा के बार-बार आग्रह के बावजूद यह निश्चित नहीं करती कि वह अगले दिन आएगी। वह वहाँ से चली जाती है। तताँरा उसे अगले दिन उसी स्थान पर मिलने की प्रतीक्षा करने की बात कहता है।

घर पहुँचने के बाद वामीरो के मन में भी बेचैनी पैदा हो जाती है। तताँरा बार-बार उसकी आँखों के सामने दिखाई देने लगता है। उसने उसके बारे में पहले से बहुत-सी बातें सुन रखी थीं। उसके मन में तताँरा एक साहसी युवक के रूप में था, लेकिन सामने आने पर वह उसे सुंदर, बलवान, शांत और भोला दिखाई दिया।

वामीरो को महसूस हुआ कि तताँरा वैसा ही है जैसा वह अपने जीवन-साथी के बारे में सोचती रही थी। लेकिन एक समस्या थीतताँरा दूसरे गाँव का युवक था और दूसरे गाँव में विवाह करना उनकी परंपरा के विरुद्ध था।

वामीरो ने सोचा कि उसे तताँरा को भूल जाना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई। तताँरा लगातार उसके मन में बना रहा।


💡 महत्वपूर्ण बातें

  • वामीरो के मन में भी तताँरा के प्रति आकर्षण उत्पन्न हुआ।
  • वामीरो ने तताँरा को साहसी, सुंदर, बलिष्ठ और शांत पाया।
  • तताँरा उसके आदर्श जीवन-साथी जैसा लगा।
  • दोनों के प्रेम में सबसे बड़ी बाधा गाँव की परंपरा थी।
  • वामीरो तताँरा को भूलना चाहती थी, लेकिन भूल नहीं पाई।

 

📜 गद्यांश–4

प्रेम, प्रतीक्षा और सामाजिक बंधन

मूल पाठ

किसी तरह रात बीती। दोनों के हृदय व्यथित थे। किसी तरह औपचारिक एक ठंडा और उजास दिन गुज़रने लगा। शाम होते ही तताँरा के लिए जीवन की अधीरता की घड़ियाँ शुरू हुईं। उसके गंभीर और शांत जीवन में ऐसा पहली बार हुआ था। वह अचंभित था, साथ ही रोमांचित भी। दिन ढलने के काफी पहले वह लपाती की उस समुद्री चट्टान पर पहुँच गया। वामीरो की प्रतीक्षा में एक-एक पल पहाड़ की तरह भारी था। उसके भीतर एक आशंका भी दौड़ रही थी। अगर वामीरो न आई तो? वह कुछ निर्णय नहीं कर पा रहा था। सिर्फ प्रतीक्षा था। बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की लहरों की तरह उठती और कभी डूबती। कभी वह टहलता, कभी वह लपाती के रास्ते पर नजरें दौड़ाता। सहसा नारियल के झुरमुटों में उसे एक आकृति कुछ साफ हुई... कुछ और... कुछ और उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। सचमुच वह वामीरो थी। लगा जैसे वह घबराहट में थी। वह अपनी ही धुन में बड़ी रही थी। बीच-बीच में इधर-उधर दृष्टि दौड़ाना न भूलती। फिर तेज कदमों से चलती हुई तताँरा के सामने आकर रुक गई। दोनों आमने-सामने थे। कुछ क्षण को दोनों के भीतर वह क्षण था। एकटक निहारते हुए वे जाने कब तक खड़े रहे। सूरज की किरणों में कहीं खो गया था। अँधेरा बढ़ रहा था। अचानक वामीरो कुछ सोचती हुई घर की तरफ दौड़ पड़ी। तताँरा अब भी वहीं खड़ा था... निश्चल... शब्दहीन...


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

व्यथित

दुखी/परेशान

औपचारिक

सामान्य रूप से किया जाने वाला

उजास

प्रकाश

अधीरता

बेचैनी

अचंभित

आश्चर्यचकित

रोमांचित

अत्यधिक उत्साहित

आशंका

भय/संदेह

आकृति

आकार/रूप

झुरमुट

पेड़-पौधों का घना समूह

एकटक

लगातार एक ही जगह देखते हुए

निश्चल

बिना हिले

शब्दहीन

जिसके पास कहने को शब्द न हों


📌 प्रसंग

इस गद्यांश में लेखक ने तताँरा की वामीरो के लिए प्रतीक्षा और दोनों के पुनर्मिलन का भावपूर्ण वर्णन किया है।


📝 सरल अर्थ

रात किसी तरह बीतती है। दोनों एक-दूसरे के बारे में सोचते रहते हैं। अगले दिन तताँरा को वामीरो से मिलने की बहुत बेचैनी रहती है। शाम होने से काफी पहले ही वह समुद्र की चट्टान पर पहुँच जाता है।

वामीरो के आने की प्रतीक्षा में उसे हर पल बहुत लंबा लगता है। उसके मन में यह डर भी था कि कहीं वामीरो आए ही न। फिर भी उसके मन में उम्मीद बनी हुई थी।

अचानक उसे नारियल के पेड़ों के बीच एक आकृति दिखाई देती है। धीरे-धीरे उसे पता चलता है कि वह वामीरो है। वामीरो भी कुछ घबराई हुई वहाँ पहुँचती है।

दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े होकर काफी देर तक एक-दूसरे को देखते रहते हैं। शाम ढल जाती है और अँधेरा बढ़ने लगता है। अचानक वामीरो घर की ओर दौड़ पड़ती है, जबकि तताँरा वहीं खड़ा रह जाता है।


💡 महत्वपूर्ण बातें

  • तताँरा वामीरो की प्रतीक्षा में बहुत व्याकुल था।
  • वामीरो भी उससे मिलने आती है।
  • दोनों कुछ समय तक मौन होकर एक-दूसरे को देखते रहते हैं।
  • उनके प्रेम में गहरी भावनात्मकता दिखाई देती है।
  • वामीरो अचानक घर लौट जाती है।

 

📜 गद्यांश–5

दोनों का मिलना और प्रेम

मूल पाठ

दोनों रोज उसी जगह पहुँचते और मुग्ध होकर एक-दूसरे को निहारते रहते। बस भीतर समर्पण था। जो अनवरत जाग रहा था। एक हाथ एक वायु ने उस प्रेम को भाँप लिया और खुशबू की तरह वह उठी। वामीरो लपाती ग्राम की थी और तताँरा पासा का। दोनों का संबंध संभव न था। रीति अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था। वामीरो और तताँरा को समझाने-बुझाने के कई प्रयास हुए किंतु दोनों अडिग रहे। वे नियमित: लपाती के उसी समुद्री किनारे पर मिलते रहे। अपना कोई मतलब नहीं था।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

मुग्ध

मोहित

निहारना

ध्यान से देखना

समर्पण

पूर्ण रूप से अपने को अर्पित करना

अनवरत

लगातार

रीति

परंपरा

अडिग

अपने निर्णय पर दृढ़

नियमित

लगातार/निश्चित रूप से

समझाने-बुझाने

समझाकर मनाने के प्रयास


📌 प्रसंग

इस अंश में लेखक ने तताँरा और वामीरो के प्रेम के दृढ़ होने तथा सामाजिक परंपरा द्वारा उनके प्रेम का विरोध किए जाने का वर्णन किया है।


📝 सरल अर्थ

तताँरा और वामीरो रोज समुद्र के किनारे मिलने लगे। वे एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न होते और उनके बीच प्रेम लगातार गहरा होता गया।

लेकिन दोनों अलग-अलग गाँवों के रहने वाले थे। वामीरो लपाती गाँव की और तताँरा पासा गाँव का था। उनके समाज की परंपरा के अनुसार विवाह के लिए दोनों का एक ही गाँव का होना आवश्यक था।

लोगों ने दोनों को समझाने और अलग करने के कई प्रयास किए, लेकिन दोनों अपने प्रेम से पीछे नहीं हटे। वे नियमित रूप से उसी समुद्री किनारे पर मिलते रहे।


💡 महत्वपूर्ण बातें

  • तताँरा और वामीरो का प्रेम गहरा हो गया।
  • दोनों रोज समुद्र किनारे मिलने लगे।
  • वामीरो लपाती गाँव की थी।
  • तताँरा पासा गाँव का था।
  • सामाजिक परंपरा के कारण उनका विवाह संभव नहीं था।
  • दोनों ने समाज के दबाव के बावजूद अपने प्रेम को नहीं छोड़ा।

 

📜 गद्यांश–6

गाँव का पशु-पर्व और वामीरो का आना

मूल पाठ

कुछ समय बाद पासा गाँव में पशु-पर्वका आयोजन हुआ। पशु-पर्व में हृष्ट-पुष्ट पशुओं के प्रदर्शन के अतिरिक्त पशुओं से युवकों की शक्ति परीक्षा प्रतियोगिता भी होती है। वर्ष में एक बार सभी गाँव के लोग हिस्सा लेते हैं। बाद में नृत्य-संगीत और भोजन का भी आयोजन होता है। शाम से सभी लोग पासा में एकत्रित होने लगे। धीरे-धीरे विभिन्न कार्यक्रम शुरू हुए। तताँरा का मन इन कार्यक्रमों में न था। उसका ध्यान वामीरो की खोज में था। उसकी उत्सुकता और बेचैनी बढ़ती जा रही थी। नारियल के झुरमुटों के पीछे से उसे जैसे कोई झाँकता दिखा। उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। वह वामीरो थी जो भयवश सामने आने में झिझक रही थी। उसकी आँखें तरल थीं। होंठ काँप रहे थे। तताँरा को देखते ही वह फूटकर रोने लगी। तताँरा विह्वल हुआ। उससे कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था। रोने की आवाज लगातार ऊँची होती जा रही थी। तताँरा किंकर्तव्यविमूढ़ था। वामीरो के रुदन स्वर में एक अजीब-सी लाचारी की वेदना और करुणा थी। इस बीच गाँव के लोग भी वहाँ पहुँच गए। वामीरो की माँ क्रोध में उठी। उसने तताँरा को तरह-तरह से अपमानित किया। गाँव के लोग भी तताँरा के विरोध में आवाजें उठाने लगे। यह तताँरा के लिए असहनीय था। वामीरो अब भी रोए जा रही थी। तताँरा को गुस्सा आ रहा था। उसे यह विवाह की निषेध परंपरा पर क्रोध था। वहाँ अपनी असहायता पर चिढ़ा। अपनी इस घटना पर कोई निश्चय नहीं था कि क्या कदम उठाना चाहिए? अनायास उसका हाथ तलवार की मूठ पर टिका। क्रोध में उसने तलवार निकाली और कुछ विचार करता रहा। क्रोध लगातार अग्नि की तरह बढ़ रहा था। लोग सहम उठे। एक सन्नाटा-सा खिंच गया। जब कोई राह न सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमें शक्ति भर उठी। उसने तलवार को अपनी ओर खींचा और तब पहाड़ दो टुकड़े हो गया। पहाड़ पर लकीर खिंच गई थी। वहाँ एक दरार होने लगी। मानो धरती दो टुकड़ों में बँटने लगी हो। एक गड़गड़ाहट-सी गूँजने लगी और लकीर की सीध में धरती फटती ही जा रही थी। द्वीप के अंतिम सिरे तक तताँरा धरती को मानो क्रोध में काटता जा रहा था। सभी भयाकुल हो उठे। लोगों ने ऐसे दृश्य की कल्पना न की थी, वे सिहर उठे। उधर वामीरो फटती धरती के किनारे चीखती हुई दौड़ रही थी। तताँरा... तताँरा... तताँरा उसकी करुण पुकार मानो गड़गड़ाहट में दबती जा रही थी। दीप के अंतिम सिरे तक धरती को चीरता वह क्रुद्ध तताँरा उसकी एक तरफ़ था। दीप के अंतिम सिरे तक धरती को चीरता वह क्रुद्ध तताँरा उसकी एक तरफ़ था।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

पशु-पर्व

पशुओं से संबंधित उत्सव

हृष्ट-पुष्ट

स्वस्थ और मजबूत

प्रदर्शन

दिखाना

प्रतियोगिता

मुकाबला

उत्सुकता

मिलने की तीव्र इच्छा

तरल

आँसुओं से भरी

विह्वल

अत्यंत व्याकुल

किंकर्तव्यविमूढ़

क्या करना है, यह न समझ पाना

रुदन

रोना

लाचारी

असहायता

वेदना

पीड़ा

अपमानित

बेइज्जत

असहनीय

जिसे सहन न किया जा सके

निषेध

रोक

मूठ

तलवार पकड़ने का हिस्सा

शमन

शांत करना

गड़गड़ाहट

तेज आवाज

दरार

फटने से बनी लंबी जगह

भयाकुल

बहुत डरा हुआ

करुण पुकार

दुख भरी आवाज


📌 प्रसंग

इस गद्यांश में पासा गाँव के पशु-पर्व, वामीरो और तताँरा के मिलन तथा गाँव वालों द्वारा उनके प्रेम का विरोध किए जाने के बाद उत्पन्न हुई दुखद घटना का वर्णन किया गया है।


📝 सरल अर्थ

पासा गाँव में पशु-पर्व आयोजित किया गया। इस अवसर पर पशुओं का प्रदर्शन, युवकों की शक्ति-परीक्षा, नृत्य, संगीत और भोजन आदि कार्यक्रम होते थे। सभी लोग उत्सव में शामिल थे, लेकिन तताँरा का मन इन कार्यक्रमों में नहीं था। वह वामीरो को खोज रहा था।

उसे नारियल के पेड़ों के पीछे वामीरो दिखाई दी। वह भयभीत थी और सामने आने में झिझक रही थी। तताँरा को देखते ही वह रोने लगी। तताँरा भी परेशान हो गया।

कुछ ही देर में गाँव के लोग वहाँ पहुँच गए। वामीरो की माँ ने तताँरा का अपमान किया और गाँव के अन्य लोग भी उसके विरोध में बोलने लगे।

तताँरा को सबसे अधिक क्रोध इस बात पर था कि सिर्फ अलग-अलग गाँव के होने के कारण उसके और वामीरो के प्रेम को स्वीकार नहीं किया जा रहा था।

क्रोध में उसने अपनी तलवार निकाल ली। उसकी तलवार में अद्भुत शक्ति थी। जब उसे कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने तलवार को अपनी ओर खींचा। इससे धरती फटने लगी और एक बड़ी दरार बनती चली गई।

लोग इस भयानक दृश्य को देखकर डर गए। वामीरो फटती धरती के किनारे तताँरा को पुकारते हुए दौड़ रही थी।


💡 महत्वपूर्ण बातें

  • पासा गाँव में पशु-पर्व का आयोजन हुआ।
  • तताँरा का ध्यान केवल वामीरो को खोजने में था।
  • वामीरो गाँव वालों और सामाजिक परंपरा के कारण दुखी थी।
  • वामीरो की माँ ने तताँरा का अपमान किया।
  • गाँव वालों ने भी उनके प्रेम का विरोध किया।
  • तताँरा क्रोध में अपनी तलवार निकालता है।
  • उसकी तलवार की शक्ति से धरती फटने लगती है।
  • यह घटना आगे दो द्वीपों के अलग होने से जुड़ती है।

 

📜 गद्यांश–7

तताँरा-वामीरो की दुखद परिणति

मूल पाठ

जैसे ही होश आया, उसने देखा उसकी तरफ़ का दीप समुद्र में धँसने लगा है। वह हड़बड़ाने लगा उसने लपाती लगाकर दूसरा सिरा थामा चाहा किंतु पकड़ ढीली पड़ गई। वह नीचे की तरफ फिसलने लगा। वह तताँरा समुद्र की ओर बढ़ता जा रहा था और उसके पीछे से सिर्फ एक चीख उभरकर डूब रही थी, “वामीरो... वामीरो... वामीरो... वामीरो...उधर वामीरो भी तताँरा... तताँरा... ता... तौ... रापुकार रही थी।

तताँरा लहूलुहान हो चुका था। वह अचेत होने लगा और कुछ देर बाद उसे कोई होश नहीं रहा। वह कटे हुए द्वीप के अंतिम भूखंड पर पड़ा हुआ था जो कि दूसरे हिस्से से संयोगवश जुड़ा था। वह बहुत थका हुआ था, कहीं दूर में उसका जीवन बह रहा था। जब नहीं जानता उधर वामीरो पागल हो उठी। वह हर समय तताँरा को खोजती हुई उसी जगह पहुँचती और घंटों बैठी रहती। उसने खाना-पीना छोड़ दिया। परिवार से वह एक तरह विलग हो गई। लोगों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की किंतु कोई सुराग न मिला।

आज न तताँरा है न वामीरो किंतु उसकी यह प्रेमकथा घर-घर में सुनाई जाती है। निकोबारियों का मत है कि तताँरा की तलवार से कार-निकोबार को जो टुकड़े हुए, उनमें दूसरा लिटिल अंडमान है जो कार-निकोबार से आज 96 कि.मी. दूर स्थित है। निकोबारियों इस घटना के बाद दूसरे गाँवों में भी आपसी वैवाहिक संबंध करने लगे। तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु शायद इसी सुखद परिवर्तन के लिए थी।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

हड़बड़ाना

घबरा जाना

फिसलना

पकड़ छूटने पर नीचे जाना

चीख

तेज आवाज में पुकार

लहूलुहान

खून से घायल

अचेत

बेहोश

भूखंड

भूमि का टुकड़ा

संयोगवश

अचानक/संयोग से

विलग

अलग

सुराग

पता/जानकारी

मत

विचार/मान्यता

त्यागमयी

त्याग से भरी

सुखद परिवर्तन

अच्छा बदलाव


📌 प्रसंग

यह पाठ के अंतिम भाग का गद्यांश है। इसमें तताँरा और वामीरो की दुखद मृत्यु तथा उनकी प्रेमकथा से निकोबारी समाज में आए परिवर्तन का वर्णन किया गया है।


📝 सरल अर्थ

धरती के दो भागों में बँट जाने के बाद तताँरा का हिस्सा समुद्र में धँसने लगा। वह उसे रोकने का प्रयास करता है, लेकिन उसकी पकड़ छूट जाती है। वह समुद्र की ओर फिसलने लगता है। दूसरी ओर वामीरो लगातार तताँरा को पुकार रही थी।

तताँरा गंभीर रूप से घायल हो चुका था और अंततः अचेत हो गया। वामीरो भी उसे खो देने के बाद बहुत दुखी हो गई। वह लगातार उसी स्थान पर जाकर बैठती और घंटों तताँरा की प्रतीक्षा करती। उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया और परिवार से अलग-सी हो गई।

लोगों ने तताँरा को खोजने का प्रयास किया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।

आज भी निकोबार में तताँरा-वामीरो की प्रेमकथा सुनाई जाती है। निकोबारियों की मान्यता है कि तताँरा की तलवार के कारण कार-निकोबार से अलग हुआ दूसरा भाग लिटिल अंडमान है।

इस घटना के बाद निकोबारी लोग दूसरे गाँवों में भी वैवाहिक संबंध बनाने लगे। इस प्रकार तताँरा और वामीरो का दुखद अंत एक सामाजिक परिवर्तन का कारण बना।


💡 महत्वपूर्ण बातें

1.   तताँरा और वामीरो का प्रेम दुखद अंत तक पहुँचता है।

2.   तताँरा गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो जाता है।

3.   वामीरो उसे खोने के बाद अत्यंत दुखी हो जाती है।

4.   वामीरो ने खाना-पीना तक छोड़ दिया।

5.   उनकी प्रेमकथा आज भी निकोबारियों में सुनाई जाती है।

6.   लोकमान्यता के अनुसार तताँरा की तलवार से द्वीप अलग हुए।

7.   इस घटना के बाद अलग-अलग गाँवों में विवाह संबंध शुरू हुए।

8.   उनकी मृत्यु सामाजिक रूढ़ि के विरुद्ध परिवर्तन का प्रतीक बन गई।


 

🌟 पाठ का केंद्रीय भाव

तताँरा-वामीरो कथा एक ऐसी लोककथा है जिसमें प्रेम, सामाजिक परंपरा, रूढ़ियों और परिवर्तन का सुंदर चित्रण मिलता है।

तताँरा और वामीरो एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन उनके समाज में अलग-अलग गाँवों के युवक-युवती का विवाह करना स्वीकार्य नहीं था। इस रूढ़ि के कारण उनका प्रेम दुखद परिणति तक पहुँचता है।

लेकिन उनकी प्रेमकथा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उनके त्याग के बाद समाज की पुरानी सोच में परिवर्तन आता है और अलग-अलग गाँवों के बीच वैवाहिक संबंधों की शुरुआत होती है।

पाठ का मुख्य संदेश

सच्चा प्रेम सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्ण परंपराओं से बड़ा होता है तथा कभी-कभी किसी व्यक्ति का त्याग पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का कारण बन सकता है।


 

📖 तताँरा-वामीरो कथा: सभी प्रश्नों के उत्तर

लेखक लीलाधर मंडलोई


🟣 मौखिक

1. तताँरा-वामीरो की कथा है?

उत्तर:
तताँरा-वामीरो की कथा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के निकोबारी समाज की एक लोककथा है। यह तताँरा और वामीरो के प्रेम तथा सामाजिक रूढ़ियों के कारण उनके दुखद अंत की कहानी है।

2. वामीरो अपना गाना क्यों भूल गई?

उत्तर:
समुद्र की एक ऊँची लहर ने वामीरो को भिगो दिया। अचानक सामने तताँरा को देखकर वह घबरा गई और उसकी सुध-बुध खो गई, इसलिए वह अपना गाना भूल गई।

3. तताँरा ने वामीरो से क्या याचना की?

उत्तर:
तताँरा ने वामीरो से उसका नाम बताने और अगले दिन उसी समुद्री चट्टान पर आने की याचना की।

4. तताँरा और वामीरो के गाँव की क्या रीति थी?

उत्तर:
उनके गाँव की रीति के अनुसार विवाह के लिए लड़के और लड़की का एक ही गाँव का होना आवश्यक था। अलग-अलग गाँवों के युवक-युवती आपस में विवाह नहीं कर सकते थे।

5. क्रोध में तताँरा ने क्या किया?

उत्तर:
क्रोध में तताँरा ने अपनी दैवीय शक्ति वाली तलवार निकालकर उसे अपनी ओर खींचा, जिससे धरती में दरार पड़ गई और द्वीप दो भागों में बँट गया।


🟢 लिखित — (क)

25–30 शब्दों में उत्तर

1. तताँरा की तलवार के बारे में लोगों का क्या मत था?

उत्तर:
लोगों का विश्वास था कि तताँरा की लकड़ी की तलवार साधारण नहीं थी। उसमें अद्भुत दैवीय शक्ति थी। तताँरा के साहसिक कारनामों के कारण यह विश्वास और भी दृढ़ था।


2. वामीरो ने तताँरा को कैसा युवक बताया?

उत्तर:
वामीरो ने तताँरा को सुंदर, बलिष्ठ, शांत, भोला और साहसी युवक माना। उसने उसके बारे में अनेक कहानियाँ सुन रखी थीं और उसे अपने कल्पित जीवन-साथी जैसा पाया।


3. तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु से निकोबार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर:
तताँरा-वामीरो की मृत्यु के बाद निकोबारी समाज में परिवर्तन आया। लोग दूसरे गाँवों में भी आपसी वैवाहिक संबंध करने लगे और पुरानी विवाह-परंपरा में ढील आई।


4. निकोबार के लोग तताँरा को क्यों पसंद करते थे?

उत्तर:
निकोबारी लोग तताँरा को उसके नेक, साहसी, मददगार और आत्मीय स्वभाव के कारण पसंद करते थे। वह संकट में लोगों की सहायता करने के लिए सदैव तैयार रहता था।


🟢 लिखित — (ख)

50–60 शब्दों में उत्तर

1. निकोबार द्वीपसमूह के होने के बारे में निकोबारियों का क्या विश्वास है?

उत्तर:
निकोबारियों का विश्वास है कि प्राचीन काल में लिटिल अंडमान और कार-निकोबार एक ही द्वीप थे। तताँरा की तलवार के कारण धरती में दरार पड़ी और दोनों अलग हो गए। लोकमान्यता के अनुसार इसी घटना के परिणामस्वरूप आज लिटिल अंडमान और कार-निकोबार अलग-अलग द्वीपों के रूप में स्थित हैं।


2. तताँरा खूब परिश्रम करने के बाद कहाँ गया? वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर:
दिनभर परिश्रम करने के बाद तताँरा समुद्र के किनारे टहलने गया। उस समय सूर्य समुद्र में डूबने वाला था। समुद्र से ठंडी बयार आ रही थी और लहरों का संगीत वातावरण को मधुर बना रहा था। समुद्र पर पड़ती सूर्य की अंतिम रंग-बिरंगी किरणें अत्यंत सुंदर लग रही थीं।


3. वामीरो से मिलने के बाद तताँरा के जीवन में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर:
वामीरो से मिलने के बाद तताँरा के शांत और गंभीर जीवन में पहली बार प्रेम और प्रतीक्षा की बेचैनी आई। वह हर समय वामीरो के बारे में सोचने लगा। उसके मन में उससे मिलने की उत्सुकता बढ़ गई और वह प्रतिदिन समुद्र के किनारे उसकी प्रतीक्षा करने लगा।


4. प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति-प्रदर्शन के लिए किस प्रकार के आयोजन किए जाते थे?

उत्तर:
प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति-प्रदर्शन के लिए पशु-पर्व जैसे आयोजन होते थे। इनमें हृष्ट-पुष्ट पशुओं का प्रदर्शन किया जाता था तथा युवकों के बीच शक्ति-परीक्षा की प्रतियोगिताएँ होती थीं। इसके बाद नृत्य, संगीत और सामूहिक भोजन का आयोजन भी किया जाता था।


5. रूढ़ियाँ जब बंधन बन बोझ बनने लगीं तब उनका टूट जाना ही अच्छा है। क्यों? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
जो परंपराएँ समाज को जोड़ती हैं और मानव जीवन को बेहतर बनाती हैं, वे उपयोगी हैं। लेकिन जब वही रूढ़ियाँ मनुष्य की स्वतंत्रता, प्रेम और सुख में बाधा बनने लगें तो उनका बदलना आवश्यक है। तताँरा-वामीरो की कथा बताती है कि संकीर्ण विवाह-परंपरा ने उनके प्रेम को रोक दिया, इसलिए बाद में समाज ने उसे बदल दिया।


🟠 लिखित — (ग)

आशय स्पष्ट कीजिए

1. “जब कोई राह न सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमें शक्ति भर उठी। उसने तलवार अपनी ओर खींचा और तताँरा ने धरती में दरार डाल दी।

उत्तर:
इस कथन का आशय है कि तताँरा वामीरो तथा अपने प्रेम के अपमान और सामाजिक रूढ़ि के कारण अत्यंत क्रोधित था। उसे कोई समाधान दिखाई नहीं दे रहा था। क्रोध में उसने अपनी अद्भुत तलवार का प्रयोग किया। तलवार को अपनी ओर खींचने पर धरती फट गई और उसमें बड़ी दरार पड़ गई।


2. “बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की ढेर पर डूबती किरणों की तरह कभी भी डूब सकती थी।

उत्तर:
इस कथन का आशय है कि तताँरा वामीरो के आने की प्रतीक्षा कर रहा था। उसके मन में उससे मिलने की उम्मीद तो थी, लेकिन साथ ही यह डर भी था कि शायद वामीरो आए ही न। इसलिए उसकी आशा समुद्र में डूबती सूर्य-किरणों की तरह कभी भी समाप्त हो सकती थी।


🔵 भाषा-अध्ययन

1. वाक्य का प्रकार पहचानिए

(क) निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे।

उत्तर: विधानवाचक वाक्य

(ख) तुमने एकाएक इतना मधुर गाना क्यों छोड़ दिया?”

उत्तर: प्रश्नवाचक वाक्य

(ग) वामीरो की माँ क्रोध में उठी।

उत्तर: विधानवाचक वाक्य

(घ) क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम?”

उत्तर: प्रश्नवाचक वाक्य

(ङ) वाह! कितना सुंदर नाम है!

उत्तर: विस्मयादिबोधक वाक्य

(च) मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा।

उत्तर: विधानवाचक वाक्य


🔵 2. मुहावरों का वाक्य में प्रयोग

(क) सुख-दुख बाँटना

वाक्य: सच्चे मित्र हमेशा एक-दूसरे के सुख-दुख बाँटते हैं।

(ख) बाट जोहना

वाक्य: माँ अपने बेटे के घर लौटने की बाट जोहती रही।

(ग) खुशी का ठिकाना न रहना

वाक्य: परीक्षा में प्रथम आने पर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

(घ) आम बुरा होना

वाक्य: बहुत देर तक धूप में रहने से उसका आम बुरा हो गया।

(ङ) आवाज उठाना

वाक्य: अन्याय के विरुद्ध सभी लोगों को आवाज उठानी चाहिए।


🔵 3. मूल शब्द और प्रत्यय

शब्द

मूल शब्द

प्रत्यय

चर्चित

चर्च

इत

साहसिक

साहस

इक

छटपटाहट

छटपट

आहट

शब्दहीन

शब्द

हीन


🔵 4. उचित उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए

उपसर्ग + शब्द

नया शब्द

अन + आकस्मिक

अनाकस्मिक

अ + ज्ञात

अज्ञात

सु + कोमल

सुकोमल

बे + होश

बेहोश

अ + घटना

अघटना

यहाँ उत्तर पाठ में दिए गए अभ्यास के शब्द-संयोजन के अनुसार रखे गए हैं।


🔵 5. निर्देशानुसार वाक्य बदलिए

(क) मिश्र वाक्य सरल वाक्य

मूल: जीवन में पहली बार मैं इस तरह विचलित हुआ हूँ।

सरल: जीवन में पहली बार मैं इस तरह विचलित हुआ हूँ।

(ख) संयुक्त वाक्य सरल वाक्य

मूल: फिर तेज कदमों से चलती हुई तताँरा के सामने आकर ठिठक गई।

सरल: तेज कदमों से चलती हुई वह तताँरा के सामने ठिठक गई।

(ग) सरल वाक्य संयुक्त वाक्य

मूल: वामीरो कुछ सोचते हुए घर की तरफ दौड़ी।

संयुक्त: वामीरो कुछ सोचती रही और वह घर की तरफ दौड़ पड़ी।

(घ) संयुक्त वाक्य सरल वाक्य

मूल: तताँरा को देखकर वह फूटकर रोने लगी।

सरल: तताँरा को देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगी।

(ङ) मिश्र वाक्य सरल वाक्य

मूल: रीति के अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था।

सरल: रीति के अनुसार दोनों का एक ही गाँव का होना आवश्यक था।


🔵 6. ‘औरशब्द के विभिन्न प्रयोग

(क) पास में सुंदर और शक्तिशाली युवक रहता था।

यहाँ और दो विशेषणोंसुंदर तथा शक्तिशालीको जोड़ रहा है।

(ख) वह एक सुंदर और प्रभावशाली युवती थी।

यहाँ और दो विशेषणों को जोड़ रहा है।

(ग) एक आकृति कुछ साफ हुई... कुछ और... कुछ और...

यहाँ और का प्रयोग क्रमशः धीरे-धीरे अधिक स्पष्ट होने के अर्थ में हुआ है।

(घ) अचानक वामीरो कुछ सोचते हुई और घर की तरफ दौड़ पड़ी।

यहाँ और दो उपवाक्यों/क्रियाओं को जोड़ने का कार्य करता है।

(ङ) वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था।

यहाँ और का अर्थ अधिकता के रूप में है।

(च) उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की।

यहाँ और का अर्थ अधिक करीब अर्थात निकटता बढ़ाने के अर्थ में है।


🔵 7. विलोम शब्द

शब्द

विलोम

भय

निर्भयता

मधुर

कटु

सत्य

असत्य

मूक

वाचाल

तरल

ठोस

उपस्थित

अनुपस्थित

सुखद

दुखद


🔵 8. दो-दो पर्यायवाची शब्द

शब्द

पर्यायवाची

समुद्र

सागर, सिंधु

आँख

नेत्र, नयन

दिन

दिवस, वार

अँधेरा

अंधकार, तम

मुँह

मुख, वदन


🔵 9. दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग

(क) किंकर्तव्यविमूढ़

अचानक आई समस्या को देखकर वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया।

(ख) विकल

वामीरो के न आने पर तताँरा विकल हो उठा।

(ग) व्याकुल

वामीरो तताँरा को खोकर बहुत व्याकुल हो गई।

(घ) आकुल

अपने प्रिय को संकट में देखकर वह आकुल हो उठी।


🔵 10. “किसी तरह अधीरचित एक ठंडा और उजास दिन गुजरने लगा।

यहाँ दिन के लिए प्रयुक्त विशेषण हैं:

  • ठंडा
  • उजास
  • अधीरचित

अपने दिन के लिए तीन विशेषण

सुहाना, व्यस्त, आनंदमय।

उदाहरण:
आज का दिन सुहाना, व्यस्त और आनंदमय रहा।


🔵 11. ‘देखनाक्रिया के विभिन्न शब्द-प्रयोग

पाठ में देखनाके कई रूप आए हैं:

  • आँखें केंद्रित करना
  • नज़र पड़ना
  • निहारना
  • टकना
  • घूरना

इनके अर्थ

निहारनाप्रेम या ध्यान से देखना।
घूरनालगातार/तीखी दृष्टि से देखना।
टकनाएकटक देखते रहना।
नज़र पड़नाअचानक दिखाई देना।
आँखें केंद्रित करनाध्यानपूर्वक किसी वस्तु को देखना।

इसी प्रकार बोलना के प्रयोग हो सकते हैं
कहना, बताना, पुकारना, चिल्लाना, फुसफुसाना, घोषणा करना।


🔵 12. पदबंध

कई पदों के योग से बने वाक्यांश को पदबंध कहते हैं। इसके मुख्य प्रकार हैं:

  • संज्ञा पदबंध
  • विशेषण पदबंध
  • क्रिया पदबंध
  • क्रियाविशेषण पदबंध

रेखांकित पदबंधों का प्रकार

(क) उसकी कल्पना में वह एक अद्भुत साहसी युवक था।
➡️ विशेषण पदबंध

(ख) तताँरा को मानो कुछ होश आया।
➡️ क्रिया पदबंध

(ग) वह भागा-भागा वहाँ पहुँच जाता।
➡️ क्रिया पदबंध

(घ) तताँरा की तलवार पर विलक्षण रूप था।
➡️ विशेषण पदबंध

(ङ) उसकी आँखें आँसुओं से भरी थीं।
➡️ क्रिया पदबंध


🟣 योग्यता-विस्तार

1. विभिन्न प्रदेशों की लोककथाओं का अध्ययन

उत्तर:
भारत के विभिन्न प्रदेशों में लोककथाओं की समृद्ध परंपरा रही है। पंचतंत्र, राजस्थान की वीर-गाथाएँ, उत्तर प्रदेश की लोककथाएँ, बंगाल की लोककथाएँ तथा उत्तर-पूर्व की जनजातीय कथाएँ भारतीय लोकजीवन, संस्कृति, परंपराओं और मान्यताओं को दर्शाती हैं।


2. अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक स्थिति

उत्तर:
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित द्वीपसमूह है। यह अनेक छोटे-बड़े द्वीपों से मिलकर बना है। पाठ में लिटिल अंडमान और कार-निकोबार का विशेष उल्लेख किया गया है।


3. अंडमान-निकोबार की प्रमुख जनजातियाँ

उत्तर:
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में विभिन्न आदिवासी समुदाय रहते हैं। इनमें निकोबारी, शॉम्पेन, जारवा, ओंगे और सेंटिनली प्रमुख जनजातीय समुदायों में गिने जाते हैं। इनकी अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति, जीवनशैली और परंपराएँ हैं।


4. दिसंबर 2004 की सुनामी का प्रभाव

उत्तर:
दिसंबर 2004 की सुनामी ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह को बहुत प्रभावित किया। समुद्र की विशाल लहरों से तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई, अनेक लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में घर तथा संपत्ति नष्ट हुई। इस प्राकृतिक आपदा ने द्वीपों के जनजीवन को लंबे समय तक प्रभावित किया।


🟠 परियोजना कार्य

प्रश्न:

अपने घर-परिवार के बुजुर्ग सदस्यों से कुछ लोककथाएँ सुनिए। उन कथाओं को अपने शब्दों में कक्षा में सुनाइए।

✍️ विद्यार्थी के लिए नमूना

मैंने अपने परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य से एक लोककथा सुनी। कथा में एक गरीब किसान अपनी मेहनत और ईमानदारी के कारण कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलता है। उसने कभी किसी के साथ धोखा नहीं किया और हमेशा जरूरतमंद लोगों की सहायता की। अंत में उसकी ईमानदारी और मेहनत का फल मिला।

इस लोककथा से मुझे यह शिक्षा मिली कि ईमानदारी, परिश्रम और अच्छे व्यवहार का परिणाम हमेशा अच्छा होता है।


परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण प्रश्न

इस पूरे अध्याय से विद्यार्थी इन प्रश्नों को विशेष रूप से तैयार करें:

1.   तताँरा का चरित्र-चित्रण कीजिए।

2.   वामीरो के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

3.   तताँरा-वामीरो के प्रेम में सबसे बड़ी बाधा क्या थी?

4.   तताँरा की तलवार को लेकर निकोबारियों का क्या विश्वास था?

5.   तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु से समाज में क्या परिवर्तन आया?

6.   रूढ़ियाँ जब बंधन बन बोझ बनने लगीं तब उनका टूट जाना ही अच्छा है”—स्पष्ट कीजिए।

7.   तताँरा और वामीरो की कथा से क्या संदेश मिलता है?

8.   पाठ में प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण कीजिए।

9.   तताँरा के व्यक्तित्व की विशेषताएँ बताइए।

10.               तताँरा-वामीरो कथा में प्रेम और सामाजिक रूढ़ियों के संघर्ष को स्पष्ट कीजिए।


🔄 Quick Revision

तताँरा कौन था?नेक, साहसी और मददगार युवक।
वामीरो कौन थी?लपाती गाँव की सुंदर युवती।
तताँरा का गाँव?पासा।
वामीरो का गाँव?लपाती।
मुख्य बाधा?अलग-अलग गाँवों में विवाह न होने की रूढ़ि।
तताँरा की विशेष वस्तु?दैवीय शक्ति वाली लकड़ी की तलवार।
मुख्य घटना?तलवार के कारण धरती का फटना।
अंतिम परिवर्तन?अलग-अलग गाँवों में वैवाहिक संबंधों की शुरुआत।


 

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