हबीब तनवीर : कारतूस — भावार्थ, प्रसंग, विस्तृत व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ (Habib Tanvir : Kartoos, Bhawarth, Prasang, Vyakhya, Kathin Shabdo ke Arth)
हबीब तनवीर — कारतूस (Habib Tanvir — Kartoos) Class 10 Hindi Sparsh
मूल पाठ एवं व्याख्या
दृश्य 1 — गोरखपुर के जंगल में कर्नल और लेफ्टिनेंट
📜 मूल पाठ
पात्र — कर्नल, लेफ्टिनेंट, सिपाही,
सवार
अवधि — 5 मिनट
जमाना — सन् 1799
समय — रात का
स्थान — गोरखपुर के जंगल में कर्नल
कालिज़ के खेमे का अंदरूनी हिस्सा।
(दो अंग्रेज़ बैठे बातें कर रहे हैं, कर्नल कालिज़ और एक लेफ्टिनेंट खेमे के बाहर हैं, चाँदनी छिटकी हुई है, अंदर लैम्प जल रहा है।)
कर्नल — जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
लेफ्टिनेंट — हँसते तो गए यहाँ खेमा डाले हुए सिपाही भी तंग आ गए हैं। ये वज़ीर अली आदमी है या भूत, हाथ ही नहीं लगता।
कर्नल — उसके अफ़साने सुनने से तो रॉबिनहुड के कारनामे याद आ जाते हैं। अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ उसके दिल में किस कदर नफ़रत है। कोई पाँच महीने हुकूमत की होगी। मगर इस पाँच महीने में वो अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से बिलकुल पाक कर देने में तक़रीबन कामयाब हो गया था।
लेफ्टिनेंट — कर्नल कालिज़ ये सआदत अली कौन है?
कर्नल — आसिफ़उद्दौला का भाई है। वज़ीर अली का और उसका दुश्मन। असल में नवाब आसिफ़उद्दौला के यहाँ लड़के की कोई उम्मीद ही नहीं थी। वज़ीर अली की पैदाइश को सआदत अली ने अपनी मौत ख़याल किया।
लेफ्टिनेंट — मगर सआदत अली को अवध के तख़्त पर बिठाने में क्या मसलेहत थी?
कर्नल — सआदत अली हमारा दोस्त है और बहुत ऐसे पसंद आदमी है इसलिए हमें अपनी आधी मुमलिकत (जायदाद, दौलत) दे दी और दस लाख रुपये नगद। अब वो भी मज़े करता है और हम भी।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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खेमे |
तंबू |
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अफ़साने |
कहानियाँ |
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कारनामे |
महत्वपूर्ण/साहसिक कार्य |
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नफ़रत |
घृणा |
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हुकूमत |
शासन |
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असर |
प्रभाव |
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पैदाइश |
जन्म |
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तख़्त |
राजगद्दी |
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मसलेहत |
स्वार्थ/हित |
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मुमलिकत |
राज्य/संपत्ति |
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नगद |
नकद धन |
📌 प्रसंग
यह संवाद गोरखपुर के जंगल में अंग्रेज़ अधिकारियों के बीच हो रहा है। कर्नल और लेफ्टिनेंट वज़ीर अली के बारे में बातचीत कर रहे हैं और उसकी गतिविधियों तथा अंग्रेज़ों के प्रति उसके विरोध पर चर्चा करते हैं।
📝 सरल अर्थ
कर्नल कहता है कि जंगल में रहना बहुत कठिन और खतरनाक है। लेफ्टिनेंट बताता है कि वहाँ रह रहे सिपाही भी परेशान हो चुके हैं। उन्हें वज़ीर अली को पकड़ने में सफलता नहीं मिल रही है। उन्हें समझ नहीं आता कि वज़ीर अली कोई साधारण आदमी है या भूत, क्योंकि वह उनके हाथ ही नहीं आता।
कर्नल वज़ीर अली की तुलना प्रसिद्ध साहसी व्यक्ति रॉबिनहुड के कारनामों से करता है। वह बताता है कि वज़ीर अली के मन में अंग्रेज़ों के प्रति बहुत अधिक विरोध है।
इसके बाद बातचीत सआदत अली पर पहुँचती है। कर्नल बताता है कि सआदत अली वज़ीर अली का दुश्मन था और अंग्रेज़ों का समर्थक था। अंग्रेज़ों ने सआदत अली को सत्ता पर बैठाया और बदले में उन्हें राज्य की संपत्ति तथा धन प्राप्त हुआ।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- अंग्रेज़ वज़ीर अली को पकड़ नहीं पा रहे थे।
- वज़ीर अली अंग्रेज़ों का विरोधी था।
- सआदत अली अंग्रेज़ों का मित्र था।
- अंग्रेज़ों ने अपने हित के लिए सआदत अली का समर्थन किया।
- वज़ीर अली को अंग्रेज़ अधिकारी बेहद साहसी और खतरनाक मानते थे।
वज़ीर अली के बारे में चर्चा
📜 मूल पाठ
लेफ्टिनेंट — सुना है ये वज़ीर अली अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को हिंदुस्तान पर हमला करने की दावत (आमंत्रण) दे रहा है।
कर्नल — अफ़गानिस्तान को हमले की दावत सबसे पहले असल में टीपू सुल्तान ने दी फिर वज़ीर अली भी उसे दिल्ली बुलाया और फिर शामसुद्दौला को।
लेफ्टिनेंट — कौन शामसुद्दौला?
कर्नल — नवाब बंगाल का रिश्तेदार (रिश्ते) भाई। बहुत ही खतरनाक आदमी है।
लेफ्टिनेंट — इसका तो मतलब ये हुआ कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है।
कर्नल — जी हाँ, और अगर ये कामयाब हो गई तो बक्सर और प्लासी के कारनामे धरे रह जाएँगे और कंपनी जो कुछ लॉर्ड क्लाइव के हाथों हासिल कर चुकी है, लॉर्ड वेलज़ली के हाथों सब खो बैठेगी।
लेफ्टिनेंट — वज़ीर अली की आज़ादी बहुत खतरनाक है। हमें किसी न किसी तरह इस शख्स को गिरफ्तार कर ही लेना चाहिए।
कर्नल — पूरी एक फ़ौज लिए उसका पीछा कर रहा है और बरसों से वो हमारी आँखों में धूल झोंक रहा है और इन्हीं जंगलों में फिर रहा है और हाथ नहीं आता। उसके साथ चंद जाँबाज़ हैं। मुट्ठी भर आदमी मगर दुश्मन हैं।
लेफ्टिनेंट — सुना है वज़ीर अली तौर से भी बहुत बहादुर आदमी है।
कर्नल — बहादुर न होता तो यूँ कंपनी के वकील को कत्ल कर देता?
लेफ्टिनेंट — ये कत्ल का क्या किस्सा हुआ था कर्नल?
कर्नल — किस्सा क्या हुआ था उसको उसके पद से हटाने के बाद हमने वज़ीर अली को बनारस पहुँचा दिया और तीन लाख रुपया सालाना वज़ीफ़ा मुकर्रर कर दिया। कुछ महीने बाद गवर्नर जनरल ने उसे कलकत्ता (कोलकाता) तलब किया। वज़ीर अली कंपनी के वकील के पास गया जो बनारस में रहता था और उससे शिकायत की कि गवर्नर जनरल उसे कलकत्ता में क्यों तलब करता है। वकील ने शिकायत की परवाह नहीं की उलटा उसे बुरा-भला सुना दिया। वज़ीर अली के तो दिल में यूँ भी अंग्रेज़ों के खिलाफ़ नफ़रत कूट-कूटकर भरी थी उसने ख़ंजर से वकील का काम तमाम कर दिया।
लेफ्टिनेंट — और भाग गया?
कर्नल — अपने जासूसों समेत आज़मगढ़ की तरफ़ भाग गया। आज़मगढ़ के हुक्मराँ ने उन लोगों को अपनी हिफ़ाज़त में घाघरा तक पहुँचा दिया। अब ये करारों इन जंगलों में कई साल से भटक रहा है।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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दावत |
निमंत्रण |
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हमला |
आक्रमण |
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रिश्तेदार |
संबंधी |
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लहर |
प्रभाव/आंदोलन |
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कामयाब |
सफल |
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कारनामे |
कार्य |
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जाँबाज़ |
बहादुर |
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मुट्ठी भर |
बहुत कम |
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कत्ल |
हत्या |
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वकील |
अधिवक्ता |
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वज़ीफ़ा |
नियमित रूप से मिलने वाला धन |
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तलब करना |
बुलाना |
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ख़ंजर |
छुरा |
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हिफ़ाज़त |
सुरक्षा |
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हुक्मराँ |
शासक |
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भटकना |
इधर-उधर घूमना |
📌 प्रसंग
इस अंश में कर्नल और लेफ्टिनेंट वज़ीर अली की गतिविधियों और उसके साहस के बारे में चर्चा कर रहे हैं। बातचीत के दौरान वज़ीर अली द्वारा कंपनी के वकील की हत्या किए जाने की घटना भी सामने आती है।
📝 सरल अर्थ
लेफ्टिनेंट को पता चला है कि वज़ीर अली अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए बुला रहा है। कर्नल बताता है कि अंग्रेज़ों के विरुद्ध कई शक्तियाँ सक्रिय हो रही हैं।
कर्नल के अनुसार यदि अंग्रेज़ों के विरुद्ध यह प्रयास सफल हो गया तो भारत में कंपनी द्वारा स्थापित सत्ता को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए वज़ीर अली को पकड़ना अंग्रेज़ों के लिए बहुत आवश्यक है।
कर्नल यह भी बताता है कि वज़ीर अली लंबे समय से अंग्रेज़ों को चकमा दे रहा है। उसके साथ बहुत कम लोग हैं, लेकिन वे सभी बहादुर हैं।
इसके बाद वज़ीर अली द्वारा कंपनी के वकील की हत्या की घटना बताई जाती है। वज़ीर अली को जब कलकत्ता बुलाए जाने की बात पता चली तो उसने कंपनी के वकील से शिकायत की। वकील ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और उसे बुरा-भला कहा। इससे नाराज़ होकर वज़ीर अली ने उसका खंजर से कत्ल कर दिया और वहाँ से भाग गया।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- वज़ीर अली अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध था।
- अंग्रेज़ उसे लंबे समय से पकड़ने का प्रयास कर रहे थे।
- वह अपने साथियों के साथ जंगलों में घूम रहा था।
- वज़ीर अली ने कंपनी के वकील की हत्या कर दी थी।
- उसकी बहादुरी और साहस से अंग्रेज़ अधिकारी चिंतित थे।
वज़ीर अली की तलाश
📜 मूल पाठ
लेफ्टिनेंट — मगर वज़ीर अली की स्कीम क्या है?
कर्नल — स्कीम ये है कि किसी तरह नेपाल पहुँचा जाए। अफ़गानी हमले का इंतज़ार करे, अपनी ताकत बढ़ाए, सआदत अली को उसके पद से हटाकर खुद अवध पर कब्जा करे और अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से निकाल दे।
लेफ्टिनेंट — नेपाल पहुँचना तो कोई ऐसा मुश्किल नहीं, मुमकिन है कि पहुँच गया हो।
कर्नल — हमारी फ़ौजों और नवाब सआदत अली खाँ के सिपाही बड़ी सख्ती से उसका पीछा कर रहे हैं। हमें अच्छी तरह मालूम है कि वो इन्हीं जंगलों में है। (एक सिपाही तेजी से दिखाई देता है।)
कर्नल — (उठकर) क्या बात है?
गौरा — दूर से गर्द उड़ती दिखाई दे रही है।
कर्नल — सिपाहियों से कहो कि तैयार रहें। (सिपाही सलाम करके चला जाता है।)
लेफ्टिनेंट — (जो खिड़की से बाहर देखने में मशगूल था) गढ़ी दूर से ऐसा लगता है जैसे पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।
कर्नल — (खिड़की के पास जाकर) हाँ एक ही सवार है। सरपट घोड़ा दौड़ता चला आ रहा है।
लेफ्टिनेंट — और सीधा हमारी तरफ़ आता मालूम होता है। (कर्नल ताली बजाकर सिपाही को बुलाता है।)
कर्नल — (सिपाही से) सिपाहियों से कहो, इस सवार पर नज़र रखें कि ये किस तरफ़ जा रहा है। (सिपाही सलाम करके चला जाता है।)
लेफ्टिनेंट — शुद्ध की तो कोई गुंजाइश ही नहीं तेज़ी से इसी तरफ़ आ रहा है। (टापों की आवाज़ बहुत करीब आकर रुक जाती है।)
सवार — (बाहर से) मुझे कर्नल से मिलना है।
गौरा — (चौंककर) बहुत खूब।
सवार — (बाहर से) सीधी।
गौरा — (अंदर आकर) हुज़ूर सवार आपसे मिलना चाहता है।
कर्नल — भेज दो।
लेफ्टिनेंट — वज़ीर अली का कोई आदमी होगा हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा।
कर्नल — शायद रहो। (सवार सिपाही के साथ अंदर आता है।)
सवार — तन्हाई! तन्हाई!
कर्नल — साहब यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है आप राज़दिल कह दें।
सवार — दीवार हमेशा दार, तन्हाई।
(कर्नल, लेफ्टिनेंट और सिपाही को इशारा करता है। दोनों बाहर चले जाते हैं। जब कर्नल और सवार खेमे में तन्हा रह जाते हैं तो ज़रा वक्त के बाद चारों तरफ देखकर सवार कहता है।)
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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स्कीम |
योजना |
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ताकत |
शक्ति |
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कब्ज़ा |
अधिकार करना |
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सख्ती |
कठोरता |
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गर्द |
धूल |
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काफ़िला |
यात्रियों/लोगों का समूह |
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सवार |
घोड़े पर बैठा व्यक्ति |
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सरपट |
बहुत तेज़ |
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गुंजाइश |
संभावना |
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तन्हाई |
अकेलापन |
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गैर |
दूसरा/अनजान |
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राज़ |
गुप्त बात |
📌 प्रसंग
इस अंश में लेफ्टिनेंट वज़ीर अली की योजना के बारे में पूछता है। कर्नल उसकी योजना बताता है। तभी एक सवार वहाँ आता है और कर्नल से अकेले में मिलने की इच्छा प्रकट करता है।
📝 सरल अर्थ
कर्नल बताता है कि वज़ीर अली की योजना नेपाल पहुँचने, अपनी शक्ति बढ़ाने और उचित अवसर मिलने पर अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से बाहर निकालने की है।
अंग्रेज़ सैनिक लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं। तभी उन्हें दूर से धूल उड़ती दिखाई देती है। थोड़ी देर बाद पता चलता है कि एक सवार तेज़ी से उनकी ओर आ रहा है।
सवार कर्नल से अकेले में मिलने की इच्छा प्रकट करता है। कर्नल अपने साथ मौजूद लोगों को बाहर भेज देता है ताकि वह सवार से अकेले में बातचीत कर सके।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- वज़ीर अली की योजना अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखना थी।
- अंग्रेज़ उसकी तलाश में लगातार लगे हुए थे।
- एक रहस्यमय सवार कर्नल से अकेले में मिलने आता है।
- सवार ने बातचीत से पहले एकांत की माँग की।
सवार और कर्नल की बातचीत
📜 मूल पाठ
सवार — आपने इस मुकाम पर क्यों खेमा डाला है?
कर्नल — कंपनी का हुक्म है कि वज़ीर अली को गिरफ्तार किया जाए।
सवार — लेकिन इतना लावलश्कर क्या मायने?
कर्नल — गिरफ्तारी में मदद देने के लिए।
सवार — वज़ीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है साहब।
कर्नल — क्यों?
सवार — वो एक जाँबाज़ सिपाही है।
कर्नल — मैंने भी यह सुन रखा है। आप क्या चाहते हैं?
सवार — चंद कारतूस।
कर्नल — किसलिए?
सवार — वज़ीर अली को गिरफ्तार करने के लिए।
कर्नल — ये लो दस कारतूस।
सवार — (मुस्कराते हुए) शुक्रिया।
कर्नल — आपका नाम?
सवार — वज़ीर अली। आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।
(यह कहकर बाहर चला जाता है, टापों का शोर सुनाई देता है। कर्नल एक सन्नाटे में है। हक्का-बक्का खड़ा है कि लेफ्टिनेंट अंदर आता है।)
लेफ्टिनेंट — कौन था?
कर्नल — (दबी ज़बान से अपने आप से कहता है) एक जाँबाज़ सिपाही।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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मुकाम |
स्थान |
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लावलश्कर |
बहुत बड़ी संख्या में सैनिक/सामान |
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गिरफ्तारी |
पकड़ना |
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जाँबाज़ |
बहुत बहादुर |
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कारतूस |
बंदूक में प्रयोग होने वाला गोला/गोली का पैकेट |
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शुक्रिया |
धन्यवाद |
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जान बख्शना |
जीवन दान देना |
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दबी ज़बान |
धीमी आवाज़ में |
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सन्नाटा |
पूर्ण शांति |
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हक्का-बक्का |
आश्चर्यचकित |
📌 प्रसंग
यह एकांकी का अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक प्रसंग है। एक सवार कर्नल से अकेले में बातचीत करता है। वह वज़ीर अली को पकड़ने में सहायता करने के नाम पर कारतूस माँगता है।
📝 सरल अर्थ
सवार कर्नल से पूछता है कि उसने इस स्थान पर अपना खेमा क्यों लगाया है। कर्नल बताता है कि कंपनी के आदेश के अनुसार वज़ीर अली को गिरफ्तार करने के लिए वह यहाँ आया है।
सवार कहता है कि वज़ीर अली को पकड़ना बहुत कठिन है क्योंकि वह बहुत बहादुर सैनिक है। इसके बाद वह कर्नल से कुछ कारतूस माँगता है और कहता है कि इनकी सहायता से वह वज़ीर अली को पकड़ सकता है।
कर्नल उसकी बात पर विश्वास कर लेता है और उसे दस कारतूस दे देता है।
तभी सवार मुस्कराकर अपनी असली पहचान बताता है—“वज़ीर अली।”
वह कर्नल से कहता है कि उसने उसे कारतूस दिए हैं, इसलिए वह उसकी जान बख्श रहा है। यह कहकर वह वहाँ से चला जाता है।
कर्नल यह देखकर स्तब्ध रह जाता है। जिस वज़ीर अली को पकड़ने के लिए इतनी बड़ी फौज लगी हुई थी, वही वज़ीर अली स्वयं उसके सामने आया, उससे कारतूस लिए और सुरक्षित चला गया।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- यह एकांकी का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग है।
- वज़ीर अली अपनी पहचान छिपाकर कर्नल के सामने आया।
- उसने कर्नल से दस कारतूस प्राप्त किए।
- कर्नल को उसकी वास्तविक पहचान का पता नहीं चला।
- जाते समय सवार ने स्वयं को वज़ीर अली बताया।
- वज़ीर अली ने अपनी चतुराई और साहस से अंग्रेज़ों को मात दी।
- कर्नल उसकी पहचान जानकर स्तब्ध रह गया।
वज़ीर अली ने कर्नल को कैसे चकमा दिया?
वज़ीर अली ने अंग्रेज़ों की पूरी योजना को समझते हुए अत्यंत चतुराई से काम लिया। वह स्वयं कर्नल के पास एक सामान्य सवार के रूप में पहुँचा। उसने कर्नल को विश्वास दिलाया कि वह वज़ीर अली को पकड़ने में सहायता करना चाहता है।
कर्नल ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया और उसे दस कारतूस दे दिए। कारतूस प्राप्त करने के बाद सवार ने अपनी वास्तविक पहचान बताते हुए कहा कि वह स्वयं वज़ीर अली है।
इस प्रकार जिस व्यक्ति को पकड़ने के लिए अंग्रेज़ अधिकारी पूरी सेना के साथ जंगल में मौजूद थे, वही व्यक्ति उनके सामने आया और उन्हें चकमा देकर निकल गया।
वज़ीर अली की प्रमुख विशेषताएँ
साहसी
वज़ीर अली अंग्रेज़ों के शिविर में जाने का जोखिम उठाता है।
निर्भीक
उसे पता है कि अंग्रेज़ उसे पकड़ना चाहते हैं, फिर भी वह उनके सामने जाने से नहीं डरता।
चतुर
वह अपनी पहचान छिपाकर कर्नल से कारतूस प्राप्त करता है।
बुद्धिमान
वह परिस्थिति को अपने पक्ष में बदल देता है और अंग्रेज़ों की योजना को विफल कर देता है।
स्वाभिमानी
वह अंग्रेज़ी शासन को स्वीकार करने के बजाय उसका विरोध करता है।
10. ‘कारतूस’ शीर्षक की सार्थकता
इस एकांकी में कारतूस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वज़ीर अली स्वयं को छिपाकर कर्नल के पास आता है और वज़ीर अली को पकड़ने के नाम पर उससे कारतूस माँगता है।
कर्नल उसे कारतूस दे देता है। इसके तुरंत बाद सवार अपनी पहचान बताता है कि वह स्वयं वज़ीर अली है।
इस घटना से एकांकी का सबसे रोमांचक प्रसंग सामने आता है। इसलिए ‘कारतूस’ शीर्षक एकांकी की मुख्य घटना से गहराई से जुड़ा हुआ और सार्थक है।
‘कारतूस’ का सारांश
हबीब तनवीर का एकांकी ‘कारतूस’ सन् 1799 की पृष्ठभूमि में लिखा गया है। इसकी शुरुआत गोरखपुर के जंगल में एक रात कर्नल और लेफ्टिनेंट की बातचीत से होती है। दोनों अंग्रेज़ अधिकारी वज़ीर अली के बारे में चर्चा करते हैं।
वज़ीर अली अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष कर रहा है और लंबे समय से उनकी पकड़ से बाहर है। अंग्रेज़ अधिकारी उसे बहुत साहसी और खतरनाक व्यक्ति मानते हैं। कर्नल और लेफ्टिनेंट उसकी गतिविधियों तथा उसे पकड़ने की योजनाओं पर बातचीत करते हैं।
कर्नल बताता है कि वज़ीर अली की योजना अपनी शक्ति बढ़ाकर अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से बाहर निकालने की है। अंग्रेज़ों की सेना लगातार उसका पीछा कर रही है, लेकिन वह उनके हाथ नहीं आता।
इसी बीच एक सवार कर्नल के पास आता है। वह उससे अकेले में बातचीत करता है और कहता है कि वज़ीर अली को पकड़ना बहुत मुश्किल है। वह कर्नल से कुछ कारतूस माँगता है और बताता है कि इनकी सहायता से वह वज़ीर अली को पकड़ने में मदद कर सकता है।
कर्नल उसकी बात पर विश्वास करके उसे दस कारतूस दे देता है। कारतूस लेने के बाद सवार मुस्कराता है और अपनी वास्तविक पहचान बताता है—वह स्वयं वज़ीर अली है।
वज़ीर अली कहता है कि कर्नल ने उसे कारतूस दिए हैं, इसलिए वह उसकी जान बख्श रहा है। इसके बाद वह वहाँ से चला जाता है। कर्नल यह देखकर स्तब्ध रह जाता है।
इस प्रकार एकांकी में वज़ीर अली की बहादुरी, निर्भीकता, चतुराई और बुद्धिमत्ता प्रभावशाली ढंग से सामने आती है।
एकांकी की प्रमुख विशेषताएँ
संवाद प्रधानता
पूरी रचना संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।
नाटकीयता
कर्नल और लेफ्टिनेंट की बातचीत तथा अचानक सवार का आना नाटकीय प्रभाव उत्पन्न करता है।
रोमांच
पाठक को लगातार यह जानने की उत्सुकता रहती है कि वज़ीर अली कहाँ है और क्या वह अंग्रेज़ों के हाथ आएगा।
रहस्य
सवार की वास्तविक पहचान अंत तक छिपी रहती है।
साहस और चतुराई
वज़ीर अली का चरित्र उसके साहस और बुद्धिमत्ता को सामने लाता है।
प्रभावशाली अंत
एकांकी का अंत उस समय अत्यंत प्रभावशाली हो जाता है जब सवार अपनी वास्तविक पहचान बताता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1. ‘कारतूस’ एकांकी के लेखक कौन हैं?
उत्तर — ‘कारतूस’ एकांकी के लेखक हबीब तनवीर हैं।
प्रश्न 2. ‘कारतूस’ एकांकी की घटना किस समय की है?
उत्तर — एकांकी की घटना सन् 1799 की है।
प्रश्न 3. एकांकी का स्थान कहाँ है?
उत्तर — एकांकी का प्रारंभ गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिज़ के खेमे से होता है।
प्रश्न 4. अंग्रेज़ अधिकारी वज़ीर अली को क्यों पकड़ना चाहते थे?
उत्तर — वज़ीर अली अंग्रेज़ों के विरुद्ध था और अंग्रेज़ी सत्ता को चुनौती दे रहा था। इसलिए अंग्रेज़ अधिकारी उसे गिरफ्तार करना चाहते थे।
प्रश्न 5. कर्नल और लेफ्टिनेंट किसके बारे में बातचीत कर रहे थे?
उत्तर — कर्नल और लेफ्टिनेंट वज़ीर अली की गतिविधियों, उसके साहस और उसे पकड़ने की योजना के बारे में बातचीत कर रहे थे।
प्रश्न 6. वज़ीर अली ने कर्नल से क्या माँगा?
उत्तर — वज़ीर अली ने सवार के रूप में कर्नल से दस कारतूस माँगे।
प्रश्न 7. कर्नल ने सवार को कारतूस क्यों दिए?
उत्तर — सवार ने कहा कि वह वज़ीर अली को गिरफ्तार करने में सहायता करना चाहता है। उसकी बात पर विश्वास करके कर्नल ने उसे दस कारतूस दे दिए।
प्रश्न 8. सवार की वास्तविक पहचान क्या थी?
उत्तर — सवार की वास्तविक पहचान वज़ीर अली की थी।
प्रश्न 9. वज़ीर अली ने कर्नल की जान क्यों बख्श दी?
उत्तर — कर्नल ने उसे कारतूस दिए थे। इसलिए वज़ीर अली ने उसकी जान बख्श दी और वहाँ से चला गया।
प्रश्न 10. वज़ीर अली के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर — वज़ीर अली साहसी, निर्भीक, चतुर, बुद्धिमान और स्वाभिमानी व्यक्ति था। वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटता था।
📌 पाठ का सार एक नज़र में
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बिंदु |
जानकारी |
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पाठ |
कारतूस |
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लेखक |
हबीब तनवीर |
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विधा |
एकांकी |
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समय |
सन् 1799 |
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स्थान |
गोरखपुर का जंगल |
|
मुख्य पात्र |
वज़ीर अली |
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अन्य पात्र |
कर्नल, लेफ्टिनेंट, सिपाही, गौरा |
|
मुख्य विषय |
वज़ीर अली का साहस और चतुराई |
|
महत्वपूर्ण घटना |
वज़ीर अली द्वारा कर्नल से कारतूस लेना |
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मुख्य संदेश |
साहस, बुद्धिमत्ता और निर्भीकता का प्रभाव |
🔖 निष्कर्ष
‘कारतूस’ एक संवादप्रधान और रोमांचक एकांकी है। हबीब तनवीर ने इसके माध्यम से वज़ीर अली के साहस, स्वाभिमान और चतुराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। एकांकी का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग वह है जब वज़ीर अली स्वयं सवार बनकर अंग्रेज़ कर्नल के सामने पहुँचता है और उसी से कारतूस लेकर अपनी पहचान बताकर निकल जाता है।
🎯 हबीब तनवीर - जीवन परिचय
🎯 हबीब तनवीर - कारतूस, प्रसंग, व्याख्या, कठिन शब्दार्थ
🎯 हबीब तनवीर - कारतूस, प्रश्न - उत्तर
🎯 हबीब तनवीर - कारतूस, पूरा पाठ
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