हबीब तनवीर — कारतूस (Habib Tanvir — Kartoos) Class 10 Hindi Sparsh

 

✍️1. लेखक परिचय — हबीब तनवीर (1923–2009)

हबीब तनवीर का जन्म 1923 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। उन्होंने 1944 में नागपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन करने गए। फिर दिल्ली लौटकर उन्होंने पेशेवर नाट्य मंच की स्थापना की।

हबीब तनवीर ने नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य निर्देशक और अभिनेता जैसे अनेक रूपों में ख्याति प्राप्त की। उन्होंने लोकनाट्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया।

कई पुरस्कारों, फैलोशिप और पद्मश्री से सम्मानित हबीब तनवीर के प्रमुख नाटकों में आगरा बाज़ार, चरणदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी, बसंत ऋतु का सपना, शाजापुर की शांति, मिट्टी की गाड़ी और मुद्राराक्षस शामिल हैं। उन्होंने ‘कारतूस’ नाटक का आधुनिक रूपांतरण भी किया।

📚 प्रमुख बिंदु

·         नाम: हबीब तनवीर

·         जन्म: 1923, रायपुर, छत्तीसगढ़

·         शिक्षा: 1944 में नागपुर से स्नातक

·         ब्रिटेन: नाट्य-लेखन का अध्ययन

·         क्षेत्र: नाटककार, कवि, पत्रकार, निर्देशक और अभिनेता

·         विशेष योगदान: लोकनाट्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य

·         सम्मान: अनेक पुरस्कार, फैलोशिप और पद्मश्री

·         प्रमुख कृतियाँ: आगरा बाज़ार, चरणदास चोर, देख रहे हैं नैन, हिरमा की अमर कहानी, बसंत ऋतु का सपना, शाजापुर की शांति, मिट्टी की गाड़ी, मुद्राराक्षस


 

2. ‘कारतूस’ एकांकी का परिचय

कारतूस एकांकी का आरंभ सन् 1799 की एक रात से होता है। स्थान है—गोरखपुर का जंगल, जहाँ कर्नल और लेफ्टिनेंट बातचीत कर रहे हैं।

उनकी बातचीत का मुख्य विषय वज़ीर अली है। अंग्रेज़ अधिकारी उसे पकड़ना चाहते हैं। वे उसे बेहद साहसी और खतरनाक व्यक्ति मानते हैं।

एकांकी में वज़ीर अली के व्यक्तित्व, उसकी बहादुरी और अंग्रेज़ों के विरुद्ध उसके संघर्ष को संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।


 

3. प्रमुख पात्र

कर्नल

अंग्रेज़ी सेना का अधिकारी, जो वज़ीर अली को पकड़ना चाहता है।

लेफ्टिनेंट

कर्नल के साथ मौजूद अंग्रेज़ अधिकारी, जो वज़ीर अली के बारे में जानकारी प्राप्त करता है।

वज़ीर अली / सवार

एक साहसी, निर्भीक और चतुर व्यक्ति, जिसे अंग्रेज़ पकड़ना चाहते हैं।

सिपाही

अंग्रेज़ अधिकारियों के साथ रहने वाले सैनिक।

गौरा

एक पात्र, जिसका उल्लेख एकांकी के मंच-निर्देशों में मिलता है।


 

4. मूल पाठ एवं व्याख्या

दृश्य 1 — गोरखपुर के जंगल में कर्नल और लेफ्टिनेंट

📜 मूल पाठ

पात्र — कर्नल, लेफ्टिनेंट, सिपाही, सवार
अवधि — 5 मिनट
जमाना — सन् 1799
समय — रात का
स्थान — गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिज़ के खेमे का अंदरूनी हिस्सा।

(दो अंग्रेज़ बैठे बातें कर रहे हैं, कर्नल कालिज़ और एक लेफ्टिनेंट खेमे के बाहर हैं, चाँदनी छिटकी हुई है, अंदर लैम्प जल रहा है।)

कर्नल — जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।

लेफ्टिनेंट — हँसते तो गए यहाँ खेमा डाले हुए सिपाही भी तंग आ गए हैं। ये वज़ीर अली आदमी है या भूत, हाथ ही नहीं लगता।

कर्नल — उसके अफ़साने सुनने से तो रॉबिनहुड के कारनामे याद आ जाते हैं। अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ उसके दिल में किस कदर नफ़रत है। कोई पाँच महीने हुकूमत की होगी। मगर इस पाँच महीने में वो अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से बिलकुल पाक कर देने में तक़रीबन कामयाब हो गया था।

लेफ्टिनेंट — कर्नल कालिज़ ये सआदत अली कौन है?

कर्नल — आसिफ़उद्दौला का भाई है। वज़ीर अली का और उसका दुश्मन। असल में नवाब आसिफ़उद्दौला के यहाँ लड़के की कोई उम्मीद ही नहीं थी। वज़ीर अली की पैदाइश को सआदत अली ने अपनी मौत ख़याल किया।

लेफ्टिनेंट — मगर सआदत अली को अवध के तख़्त पर बिठाने में क्या मसलेहत थी?

कर्नल — सआदत अली हमारा दोस्त है और बहुत ऐसे पसंद आदमी है इसलिए हमें अपनी आधी मुमलिकत (जायदाद, दौलत) दे दी और दस लाख रुपये नगद। अब वो भी मज़े करता है और हम भी।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

खेमे

तंबू

अफ़साने

कहानियाँ

कारनामे

महत्वपूर्ण/साहसिक कार्य

नफ़रत

घृणा

हुकूमत

शासन

असर

प्रभाव

पैदाइश

जन्म

तख़्त

राजगद्दी

मसलेहत

स्वार्थ/हित

मुमलिकत

राज्य/संपत्ति

नगद

नकद धन

📌 प्रसंग

यह संवाद गोरखपुर के जंगल में अंग्रेज़ अधिकारियों के बीच हो रहा है। कर्नल और लेफ्टिनेंट वज़ीर अली के बारे में बातचीत कर रहे हैं और उसकी गतिविधियों तथा अंग्रेज़ों के प्रति उसके विरोध पर चर्चा करते हैं।

📝 सरल अर्थ

कर्नल कहता है कि जंगल में रहना बहुत कठिन और खतरनाक है। लेफ्टिनेंट बताता है कि वहाँ रह रहे सिपाही भी परेशान हो चुके हैं। उन्हें वज़ीर अली को पकड़ने में सफलता नहीं मिल रही है। उन्हें समझ नहीं आता कि वज़ीर अली कोई साधारण आदमी है या भूत, क्योंकि वह उनके हाथ ही नहीं आता।

कर्नल वज़ीर अली की तुलना प्रसिद्ध साहसी व्यक्ति रॉबिनहुड के कारनामों से करता है। वह बताता है कि वज़ीर अली के मन में अंग्रेज़ों के प्रति बहुत अधिक विरोध है।

इसके बाद बातचीत सआदत अली पर पहुँचती है। कर्नल बताता है कि सआदत अली वज़ीर अली का दुश्मन था और अंग्रेज़ों का समर्थक था। अंग्रेज़ों ने सआदत अली को सत्ता पर बैठाया और बदले में उन्हें राज्य की संपत्ति तथा धन प्राप्त हुआ।

💡 महत्वपूर्ण बातें

  • अंग्रेज़ वज़ीर अली को पकड़ नहीं पा रहे थे।
  • वज़ीर अली अंग्रेज़ों का विरोधी था।
  • सआदत अली अंग्रेज़ों का मित्र था।
  • अंग्रेज़ों ने अपने हित के लिए सआदत अली का समर्थन किया।
  • वज़ीर अली को अंग्रेज़ अधिकारी बेहद साहसी और खतरनाक मानते थे।

 

5. वज़ीर अली के बारे में चर्चा

📜 मूल पाठ

लेफ्टिनेंट — सुना है ये वज़ीर अली अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को हिंदुस्तान पर हमला करने की दावत (आमंत्रण) दे रहा है।

कर्नल — अफ़गानिस्तान को हमले की दावत सबसे पहले असल में टीपू सुल्तान ने दी फिर वज़ीर अली भी उसे दिल्ली बुलाया और फिर शामसुद्दौला को।

लेफ्टिनेंट — कौन शामसुद्दौला?

कर्नल — नवाब बंगाल का रिश्तेदार (रिश्ते) भाई। बहुत ही खतरनाक आदमी है।

लेफ्टिनेंट — इसका तो मतलब ये हुआ कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है।

कर्नल — जी हाँ, और अगर ये कामयाब हो गई तो बक्सर और प्लासी के कारनामे धरे रह जाएँगे और कंपनी जो कुछ लॉर्ड क्लाइव के हाथों हासिल कर चुकी है, लॉर्ड वेलज़ली के हाथों सब खो बैठेगी।

लेफ्टिनेंट — वज़ीर अली की आज़ादी बहुत खतरनाक है। हमें किसी न किसी तरह इस शख्स को गिरफ्तार कर ही लेना चाहिए।

कर्नल — पूरी एक फ़ौज लिए उसका पीछा कर रहा है और बरसों से वो हमारी आँखों में धूल झोंक रहा है और इन्हीं जंगलों में फिर रहा है और हाथ नहीं आता। उसके साथ चंद जाँबाज़ हैं। मुट्ठी भर आदमी मगर दुश्मन हैं।

लेफ्टिनेंट — सुना है वज़ीर अली तौर से भी बहुत बहादुर आदमी है।

कर्नल — बहादुर न होता तो यूँ कंपनी के वकील को कत्ल कर देता?

लेफ्टिनेंट — ये कत्ल का क्या किस्सा हुआ था कर्नल?

कर्नल — किस्सा क्या हुआ था उसको उसके पद से हटाने के बाद हमने वज़ीर अली को बनारस पहुँचा दिया और तीन लाख रुपया सालाना वज़ीफ़ा मुकर्रर कर दिया। कुछ महीने बाद गवर्नर जनरल ने उसे कलकत्ता (कोलकाता) तलब किया। वज़ीर अली कंपनी के वकील के पास गया जो बनारस में रहता था और उससे शिकायत की कि गवर्नर जनरल उसे कलकत्ता में क्यों तलब करता है। वकील ने शिकायत की परवाह नहीं की उलटा उसे बुरा-भला सुना दिया। वज़ीर अली के तो दिल में यूँ भी अंग्रेज़ों के खिलाफ़ नफ़रत कूट-कूटकर भरी थी उसने ख़ंजर से वकील का काम तमाम कर दिया।

लेफ्टिनेंट — और भाग गया?

कर्नल — अपने जासूसों समेत आज़मगढ़ की तरफ़ भाग गया। आज़मगढ़ के हुक्मराँ ने उन लोगों को अपनी हिफ़ाज़त में घाघरा तक पहुँचा दिया। अब ये करारों इन जंगलों में कई साल से भटक रहा है।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

दावत

निमंत्रण

हमला

आक्रमण

रिश्तेदार

संबंधी

लहर

प्रभाव/आंदोलन

कामयाब

सफल

कारनामे

कार्य

जाँबाज़

बहादुर

मुट्ठी भर

बहुत कम

कत्ल

हत्या

वकील

अधिवक्ता

वज़ीफ़ा

नियमित रूप से मिलने वाला धन

तलब करना

बुलाना

ख़ंजर

छुरा

हिफ़ाज़त

सुरक्षा

हुक्मराँ

शासक

भटकना

इधर-उधर घूमना

📌 प्रसंग

इस अंश में कर्नल और लेफ्टिनेंट वज़ीर अली की गतिविधियों और उसके साहस के बारे में चर्चा कर रहे हैं। बातचीत के दौरान वज़ीर अली द्वारा कंपनी के वकील की हत्या किए जाने की घटना भी सामने आती है।

📝 सरल अर्थ

लेफ्टिनेंट को पता चला है कि वज़ीर अली अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए बुला रहा है। कर्नल बताता है कि अंग्रेज़ों के विरुद्ध कई शक्तियाँ सक्रिय हो रही हैं।

कर्नल के अनुसार यदि अंग्रेज़ों के विरुद्ध यह प्रयास सफल हो गया तो भारत में कंपनी द्वारा स्थापित सत्ता को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए वज़ीर अली को पकड़ना अंग्रेज़ों के लिए बहुत आवश्यक है।

कर्नल यह भी बताता है कि वज़ीर अली लंबे समय से अंग्रेज़ों को चकमा दे रहा है। उसके साथ बहुत कम लोग हैं, लेकिन वे सभी बहादुर हैं।

इसके बाद वज़ीर अली द्वारा कंपनी के वकील की हत्या की घटना बताई जाती है। वज़ीर अली को जब कलकत्ता बुलाए जाने की बात पता चली तो उसने कंपनी के वकील से शिकायत की। वकील ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और उसे बुरा-भला कहा। इससे नाराज़ होकर वज़ीर अली ने उसका खंजर से कत्ल कर दिया और वहाँ से भाग गया।

💡 महत्वपूर्ण बातें

  • वज़ीर अली अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध था।
  • अंग्रेज़ उसे लंबे समय से पकड़ने का प्रयास कर रहे थे।
  • वह अपने साथियों के साथ जंगलों में घूम रहा था।
  • वज़ीर अली ने कंपनी के वकील की हत्या कर दी थी।
  • उसकी बहादुरी और साहस से अंग्रेज़ अधिकारी चिंतित थे।

 

6. वज़ीर अली की तलाश

📜 मूल पाठ

लेफ्टिनेंट — मगर वज़ीर अली की स्कीम क्या है?

कर्नल — स्कीम ये है कि किसी तरह नेपाल पहुँचा जाए। अफ़गानी हमले का इंतज़ार करे, अपनी ताकत बढ़ाए, सआदत अली को उसके पद से हटाकर खुद अवध पर कब्जा करे और अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से निकाल दे।

लेफ्टिनेंट — नेपाल पहुँचना तो कोई ऐसा मुश्किल नहीं, मुमकिन है कि पहुँच गया हो।

कर्नल — हमारी फ़ौजों और नवाब सआदत अली खाँ के सिपाही बड़ी सख्ती से उसका पीछा कर रहे हैं। हमें अच्छी तरह मालूम है कि वो इन्हीं जंगलों में है। (एक सिपाही तेजी से दिखाई देता है।)

कर्नल — (उठकर) क्या बात है?

गौरा — दूर से गर्द उड़ती दिखाई दे रही है।

कर्नल — सिपाहियों से कहो कि तैयार रहें। (सिपाही सलाम करके चला जाता है।)

लेफ्टिनेंट — (जो खिड़की से बाहर देखने में मशगूल था) गढ़ी दूर से ऐसा लगता है जैसे पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।

कर्नल — (खिड़की के पास जाकर) हाँ एक ही सवार है। सरपट घोड़ा दौड़ता चला आ रहा है।

लेफ्टिनेंट — और सीधा हमारी तरफ़ आता मालूम होता है। (कर्नल ताली बजाकर सिपाही को बुलाता है।)

कर्नल — (सिपाही से) सिपाहियों से कहो, इस सवार पर नज़र रखें कि ये किस तरफ़ जा रहा है। (सिपाही सलाम करके चला जाता है।)

लेफ्टिनेंट — शुद्ध की तो कोई गुंजाइश ही नहीं तेज़ी से इसी तरफ़ आ रहा है। (टापों की आवाज़ बहुत करीब आकर रुक जाती है।)

सवार — (बाहर से) मुझे कर्नल से मिलना है।

गौरा — (चौंककर) बहुत खूब।

सवार — (बाहर से) सीधी।

गौरा — (अंदर आकर) हुज़ूर सवार आपसे मिलना चाहता है।

कर्नल — भेज दो।

लेफ्टिनेंट — वज़ीर अली का कोई आदमी होगा हमसे मिलकर उसे गिरफ्तार करवाना चाहता होगा।

कर्नल — शायद रहो। (सवार सिपाही के साथ अंदर आता है।)

सवार — तन्हाई! तन्हाई!

कर्नल — साहब यहाँ कोई गैर आदमी नहीं है आप राज़दिल कह दें।

सवार — दीवार हमेशा दार, तन्हाई।

(कर्नल, लेफ्टिनेंट और सिपाही को इशारा करता है। दोनों बाहर चले जाते हैं। जब कर्नल और सवार खेमे में तन्हा रह जाते हैं तो ज़रा वक्त के बाद चारों तरफ देखकर सवार कहता है।)


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

स्कीम

योजना

ताकत

शक्ति

कब्ज़ा

अधिकार करना

सख्ती

कठोरता

गर्द

धूल

काफ़िला

यात्रियों/लोगों का समूह

सवार

घोड़े पर बैठा व्यक्ति

सरपट

बहुत तेज़

गुंजाइश

संभावना

तन्हाई

अकेलापन

गैर

दूसरा/अनजान

राज़

गुप्त बात

📌 प्रसंग

इस अंश में लेफ्टिनेंट वज़ीर अली की योजना के बारे में पूछता है। कर्नल उसकी योजना बताता है। तभी एक सवार वहाँ आता है और कर्नल से अकेले में मिलने की इच्छा प्रकट करता है।

📝 सरल अर्थ

कर्नल बताता है कि वज़ीर अली की योजना नेपाल पहुँचने, अपनी शक्ति बढ़ाने और उचित अवसर मिलने पर अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से बाहर निकालने की है।

अंग्रेज़ सैनिक लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं। तभी उन्हें दूर से धूल उड़ती दिखाई देती है। थोड़ी देर बाद पता चलता है कि एक सवार तेज़ी से उनकी ओर आ रहा है।

सवार कर्नल से अकेले में मिलने की इच्छा प्रकट करता है। कर्नल अपने साथ मौजूद लोगों को बाहर भेज देता है ताकि वह सवार से अकेले में बातचीत कर सके।

💡 महत्वपूर्ण बातें

  • वज़ीर अली की योजना अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष जारी रखना थी।
  • अंग्रेज़ उसकी तलाश में लगातार लगे हुए थे।
  • एक रहस्यमय सवार कर्नल से अकेले में मिलने आता है।
  • सवार ने बातचीत से पहले एकांत की माँग की।

 

7. सवार और कर्नल की बातचीत

📜 मूल पाठ

सवार — आपने इस मुकाम पर क्यों खेमा डाला है?

कर्नल — कंपनी का हुक्म है कि वज़ीर अली को गिरफ्तार किया जाए।

सवार — लेकिन इतना लावलश्कर क्या मायने?

कर्नल — गिरफ्तारी में मदद देने के लिए।

सवार — वज़ीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है साहब।

कर्नल — क्यों?

सवार — वो एक जाँबाज़ सिपाही है।

कर्नल — मैंने भी यह सुन रखा है। आप क्या चाहते हैं?

सवार — चंद कारतूस।

कर्नल — किसलिए?

सवार — वज़ीर अली को गिरफ्तार करने के लिए।

कर्नल — ये लो दस कारतूस।

सवार — (मुस्कराते हुए) शुक्रिया।

कर्नल — आपका नाम?

सवार — वज़ीर अली। आपने मुझे कारतूस दिए इसलिए आपकी जान बख्शी करता हूँ।

(यह कहकर बाहर चला जाता है, टापों का शोर सुनाई देता है। कर्नल एक सन्नाटे में है। हक्का-बक्का खड़ा है कि लेफ्टिनेंट अंदर आता है।)

लेफ्टिनेंट — कौन था?

कर्नल — (दबी ज़बान से अपने आप से कहता है) एक जाँबाज़ सिपाही।


🔤 कठिन शब्दार्थ

शब्द

अर्थ

मुकाम

स्थान

लावलश्कर

बहुत बड़ी संख्या में सैनिक/सामान

गिरफ्तारी

पकड़ना

जाँबाज़

बहुत बहादुर

कारतूस

बंदूक में प्रयोग होने वाला गोला/गोली का पैकेट

शुक्रिया

धन्यवाद

जान बख्शना

जीवन दान देना

दबी ज़बान

धीमी आवाज़ में

सन्नाटा

पूर्ण शांति

हक्का-बक्का

आश्चर्यचकित

📌 प्रसंग

यह एकांकी का अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक प्रसंग है। एक सवार कर्नल से अकेले में बातचीत करता है। वह वज़ीर अली को पकड़ने में सहायता करने के नाम पर कारतूस माँगता है।

📝 सरल अर्थ

सवार कर्नल से पूछता है कि उसने इस स्थान पर अपना खेमा क्यों लगाया है। कर्नल बताता है कि कंपनी के आदेश के अनुसार वज़ीर अली को गिरफ्तार करने के लिए वह यहाँ आया है।

सवार कहता है कि वज़ीर अली को पकड़ना बहुत कठिन है क्योंकि वह बहुत बहादुर सैनिक है। इसके बाद वह कर्नल से कुछ कारतूस माँगता है और कहता है कि इनकी सहायता से वह वज़ीर अली को पकड़ सकता है।

कर्नल उसकी बात पर विश्वास कर लेता है और उसे दस कारतूस दे देता है।

तभी सवार मुस्कराकर अपनी असली पहचान बताता है—“वज़ीर अली।”

वह कर्नल से कहता है कि उसने उसे कारतूस दिए हैं, इसलिए वह उसकी जान बख्श रहा है। यह कहकर वह वहाँ से चला जाता है।

कर्नल यह देखकर स्तब्ध रह जाता है। जिस वज़ीर अली को पकड़ने के लिए इतनी बड़ी फौज लगी हुई थी, वही वज़ीर अली स्वयं उसके सामने आया, उससे कारतूस लिए और सुरक्षित चला गया।

💡 महत्वपूर्ण बातें

  • यह एकांकी का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग है।
  • वज़ीर अली अपनी पहचान छिपाकर कर्नल के सामने आया।
  • उसने कर्नल से दस कारतूस प्राप्त किए।
  • कर्नल को उसकी वास्तविक पहचान का पता नहीं चला।
  • जाते समय सवार ने स्वयं को वज़ीर अली बताया।
  • वज़ीर अली ने अपनी चतुराई और साहस से अंग्रेज़ों को मात दी।
  • कर्नल उसकी पहचान जानकर स्तब्ध रह गया।

 

8. वज़ीर अली ने कर्नल को कैसे चकमा दिया?

वज़ीर अली ने अंग्रेज़ों की पूरी योजना को समझते हुए अत्यंत चतुराई से काम लिया। वह स्वयं कर्नल के पास एक सामान्य सवार के रूप में पहुँचा। उसने कर्नल को विश्वास दिलाया कि वह वज़ीर अली को पकड़ने में सहायता करना चाहता है।

कर्नल ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया और उसे दस कारतूस दे दिए। कारतूस प्राप्त करने के बाद सवार ने अपनी वास्तविक पहचान बताते हुए कहा कि वह स्वयं वज़ीर अली है।

इस प्रकार जिस व्यक्ति को पकड़ने के लिए अंग्रेज़ अधिकारी पूरी सेना के साथ जंगल में मौजूद थे, वही व्यक्ति उनके सामने आया और उन्हें चकमा देकर निकल गया।


 

9. वज़ीर अली की प्रमुख विशेषताएँ

साहसी

वज़ीर अली अंग्रेज़ों के शिविर में जाने का जोखिम उठाता है।

निर्भीक

उसे पता है कि अंग्रेज़ उसे पकड़ना चाहते हैं, फिर भी वह उनके सामने जाने से नहीं डरता।

चतुर

वह अपनी पहचान छिपाकर कर्नल से कारतूस प्राप्त करता है।

बुद्धिमान

वह परिस्थिति को अपने पक्ष में बदल देता है और अंग्रेज़ों की योजना को विफल कर देता है।

स्वाभिमानी

वह अंग्रेज़ी शासन को स्वीकार करने के बजाय उसका विरोध करता है।


 

10. ‘कारतूस’ शीर्षक की सार्थकता

इस एकांकी में कारतूस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वज़ीर अली स्वयं को छिपाकर कर्नल के पास आता है और वज़ीर अली को पकड़ने के नाम पर उससे कारतूस माँगता है।

कर्नल उसे कारतूस दे देता है। इसके तुरंत बाद सवार अपनी पहचान बताता है कि वह स्वयं वज़ीर अली है।

इस घटना से एकांकी का सबसे रोमांचक प्रसंग सामने आता है। इसलिए ‘कारतूस’ शीर्षक एकांकी की मुख्य घटना से गहराई से जुड़ा हुआ और सार्थक है।


 

11. ‘कारतूस’ का सारांश

हबीब तनवीर का एकांकी ‘कारतूस’ सन् 1799 की पृष्ठभूमि में लिखा गया है। इसकी शुरुआत गोरखपुर के जंगल में एक रात कर्नल और लेफ्टिनेंट की बातचीत से होती है। दोनों अंग्रेज़ अधिकारी वज़ीर अली के बारे में चर्चा करते हैं।

वज़ीर अली अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष कर रहा है और लंबे समय से उनकी पकड़ से बाहर है। अंग्रेज़ अधिकारी उसे बहुत साहसी और खतरनाक व्यक्ति मानते हैं। कर्नल और लेफ्टिनेंट उसकी गतिविधियों तथा उसे पकड़ने की योजनाओं पर बातचीत करते हैं।

कर्नल बताता है कि वज़ीर अली की योजना अपनी शक्ति बढ़ाकर अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से बाहर निकालने की है। अंग्रेज़ों की सेना लगातार उसका पीछा कर रही है, लेकिन वह उनके हाथ नहीं आता।

इसी बीच एक सवार कर्नल के पास आता है। वह उससे अकेले में बातचीत करता है और कहता है कि वज़ीर अली को पकड़ना बहुत मुश्किल है। वह कर्नल से कुछ कारतूस माँगता है और बताता है कि इनकी सहायता से वह वज़ीर अली को पकड़ने में मदद कर सकता है।

कर्नल उसकी बात पर विश्वास करके उसे दस कारतूस दे देता है। कारतूस लेने के बाद सवार मुस्कराता है और अपनी वास्तविक पहचान बताता है—वह स्वयं वज़ीर अली है।

वज़ीर अली कहता है कि कर्नल ने उसे कारतूस दिए हैं, इसलिए वह उसकी जान बख्श रहा है। इसके बाद वह वहाँ से चला जाता है। कर्नल यह देखकर स्तब्ध रह जाता है।

इस प्रकार एकांकी में वज़ीर अली की बहादुरी, निर्भीकता, चतुराई और बुद्धिमत्ता प्रभावशाली ढंग से सामने आती है।


 

12. एकांकी की प्रमुख विशेषताएँ

संवाद प्रधानता

पूरी रचना संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।

नाटकीयता

कर्नल और लेफ्टिनेंट की बातचीत तथा अचानक सवार का आना नाटकीय प्रभाव उत्पन्न करता है।

रोमांच

पाठक को लगातार यह जानने की उत्सुकता रहती है कि वज़ीर अली कहाँ है और क्या वह अंग्रेज़ों के हाथ आएगा।

रहस्य

सवार की वास्तविक पहचान अंत तक छिपी रहती है।

साहस और चतुराई

वज़ीर अली का चरित्र उसके साहस और बुद्धिमत्ता को सामने लाता है।

प्रभावशाली अंत

एकांकी का अंत उस समय अत्यंत प्रभावशाली हो जाता है जब सवार अपनी वास्तविक पहचान बताता है।


 

13. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. ‘कारतूस’ एकांकी के लेखक कौन हैं?

उत्तर — ‘कारतूस’ एकांकी के लेखक हबीब तनवीर हैं।

प्रश्न 2. ‘कारतूस’ एकांकी की घटना किस समय की है?

उत्तर — एकांकी की घटना सन् 1799 की है।

प्रश्न 3. एकांकी का स्थान कहाँ है?

उत्तर — एकांकी का प्रारंभ गोरखपुर के जंगल में कर्नल कालिज़ के खेमे से होता है।

प्रश्न 4. अंग्रेज़ अधिकारी वज़ीर अली को क्यों पकड़ना चाहते थे?

उत्तर — वज़ीर अली अंग्रेज़ों के विरुद्ध था और अंग्रेज़ी सत्ता को चुनौती दे रहा था। इसलिए अंग्रेज़ अधिकारी उसे गिरफ्तार करना चाहते थे।

प्रश्न 5. कर्नल और लेफ्टिनेंट किसके बारे में बातचीत कर रहे थे?

उत्तर — कर्नल और लेफ्टिनेंट वज़ीर अली की गतिविधियों, उसके साहस और उसे पकड़ने की योजना के बारे में बातचीत कर रहे थे।

प्रश्न 6. वज़ीर अली ने कर्नल से क्या माँगा?

उत्तर — वज़ीर अली ने सवार के रूप में कर्नल से दस कारतूस माँगे।

प्रश्न 7. कर्नल ने सवार को कारतूस क्यों दिए?

उत्तर — सवार ने कहा कि वह वज़ीर अली को गिरफ्तार करने में सहायता करना चाहता है। उसकी बात पर विश्वास करके कर्नल ने उसे दस कारतूस दे दिए।

प्रश्न 8. सवार की वास्तविक पहचान क्या थी?

उत्तर — सवार की वास्तविक पहचान वज़ीर अली की थी।

प्रश्न 9. वज़ीर अली ने कर्नल की जान क्यों बख्श दी?

उत्तर — कर्नल ने उसे कारतूस दिए थे। इसलिए वज़ीर अली ने उसकी जान बख्श दी और वहाँ से चला गया।

प्रश्न 10. वज़ीर अली के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर — वज़ीर अली साहसी, निर्भीक, चतुर, बुद्धिमान और स्वाभिमानी व्यक्ति था। वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटता था।


📌 पाठ का सार एक नज़र में

बिंदु

जानकारी

पाठ

कारतूस

लेखक

हबीब तनवीर

विधा

एकांकी

समय

सन् 1799

स्थान

गोरखपुर का जंगल

मुख्य पात्र

वज़ीर अली

अन्य पात्र

कर्नल, लेफ्टिनेंट, सिपाही, गौरा

मुख्य विषय

वज़ीर अली का साहस और चतुराई

महत्वपूर्ण घटना

वज़ीर अली द्वारा कर्नल से कारतूस लेना

मुख्य संदेश

साहस, बुद्धिमत्ता और निर्भीकता का प्रभाव

🔖 निष्कर्ष

‘कारतूस’ एक संवादप्रधान और रोमांचक एकांकी है। हबीब तनवीर ने इसके माध्यम से वज़ीर अली के साहस, स्वाभिमान और चतुराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। एकांकी का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग वह है जब वज़ीर अली स्वयं सवार बनकर अंग्रेज़ कर्नल के सामने पहुँचता है और उसी से कारतूस लेकर अपनी पहचान बताकर निकल जाता है।

बिल्कुल भाई। अब ‘कारतूस’ के प्रश्न-अभ्यास का PDF भी मिल गया है। इसमें केवल प्रश्न ही नहीं, बल्कि मौखिक, लिखित, आशय स्पष्ट कीजिए, भाषा-अध्ययन, योग्यता विस्तार और परियोजना—सभी भाग दिए गए हैं। इसलिए ब्लॉग में इसे उसी क्रम में रखना सबसे सही रहेगा।

नीचे इसे सीधे ब्लॉग में Copy-Paste करने योग्य रूप में तैयार कर रहा हूँ।


 

कारतूस — प्रश्न-अभ्यास एवं प्रश्न-उत्तर

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए—

प्रश्न 1. कर्नल कालिज़ का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?

उत्तर — कर्नल कालिज़ का खेमा जंगल में इसलिए लगा हुआ था क्योंकि कंपनी के आदेश के अनुसार उसे वज़ीर अली को गिरफ्तार करना था।

प्रश्न 2. वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?

उत्तर — वज़ीर अली लंबे समय से अंग्रेज़ों को चकमा दे रहा था और उनकी पकड़ में नहीं आ रहा था। इसलिए उसकी तलाश में लगे सिपाही तंग आ चुके थे।

प्रश्न 3. कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?

उत्तर — कर्नल को संदेह था कि सवार वज़ीर अली का कोई आदमी हो सकता है। इसलिए उसने सिपाहियों को उस पर नज़र रखने के लिए कहा।

प्रश्न 4. सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ्तारी बहुत मुश्किल है?

उत्तर — सवार ने कहा कि वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही है और उसे पकड़ना आसान नहीं है।


लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25–30 शब्दों में) लिखिए—

प्रश्न 1. वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?

उत्तर — वज़ीर अली अंग्रेज़ों के विरुद्ध साहसपूर्वक संघर्ष करता था और लंबे समय से उनकी पकड़ से बाहर था। उसके साहसिक कारनामे कर्नल को रॉबिनहुड की याद दिलाते थे।

प्रश्न 2. सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?

उत्तर — सआदत अली, आसिफ़उद्दौला का भाई और वज़ीर अली का दुश्मन था। उसे डर था कि वज़ीर अली के जन्म से उसकी सत्ता और महत्व समाप्त हो जाएगा।

प्रश्न 3. सआदत अली को अवध के तख़्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?

उत्तर — अंग्रेज़ों का उद्देश्य अपने हितों की रक्षा करना था। सआदत अली उनका समर्थक था और उसने अंग्रेज़ों को आधी मुमलिकत तथा दस लाख रुपये दिए थे।

प्रश्न 4. कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?

उत्तर — कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली अपने जासूसों समेत आज़मगढ़ की तरफ़ भाग गया। वहाँ के हुक्मराँ ने उसे घाघरा तक सुरक्षा दी।

प्रश्न 5. सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?

उत्तर — सवार के जाने के बाद कर्नल को पता चला कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं वज़ीर अली था। इस कारण वह हक्का-बक्का रह गया।


(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50–60 शब्दों में) लिखिए—

प्रश्न 1. लेफ्टिनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?

उत्तर — लेफ्टिनेंट को ऐसा इसलिए लगा क्योंकि कंपनी के विरुद्ध कई शक्तियाँ सक्रिय हो रही थीं। वज़ीर अली अंग्रेज़ों का विरोध कर रहा था और अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-जमा को हिंदुस्तान पर हमला करने के लिए आमंत्रित कर रहा था। इसके अलावा टीपू सुल्तान और शामसुद्दौला जैसे लोगों का भी अंग्रेज़ों के विरुद्ध होना कंपनी के लिए चिंता का कारण था।

प्रश्न 2. वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?

उत्तर — वज़ीर अली को जब गवर्नर जनरल द्वारा कलकत्ता बुलाए जाने की सूचना मिली तो उसने कंपनी के वकील से इसका कारण पूछा। वकील ने उसकी शिकायत की परवाह नहीं की और उसे बुरा-भला कहा। वज़ीर अली के मन में अंग्रेज़ों के प्रति पहले से ही बहुत नफ़रत थी। इसलिए उसने गुस्से में वकील का कत्ल कर दिया।

प्रश्न 3. सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?

उत्तर — सवार ने कर्नल से अकेले में बातचीत की। उसने कहा कि वज़ीर अली को पकड़ना बहुत मुश्किल है क्योंकि वह एक जाँबाज़ सिपाही है। जब कर्नल ने पूछा कि वह क्या चाहता है, तो सवार ने कुछ कारतूस माँगे। उसने कहा कि इनकी मदद से वह वज़ीर अली को गिरफ्तार कर सकता है। कर्नल ने उसे दस कारतूस दे दिए।

प्रश्न 4. वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर — वज़ीर अली अत्यंत साहसी और निर्भीक था। अंग्रेज़ उसे पकड़ने के लिए पूरी सेना के साथ जंगलों में घूम रहे थे, फिर भी वह उनसे नहीं डरता था। वह अंग्रेज़ों के शिविर में अकेला पहुँचा और अपनी पहचान छिपाकर कर्नल से कारतूस प्राप्त कर लिए। बाद में अपनी पहचान बताकर वह सुरक्षित निकल गया।


 

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए—

प्रश्न 1. “मुट्ठीभर आदमी और ये दमखम।”

उत्तर — इस कथन का आशय है कि वज़ीर अली के साथ बहुत कम लोग थे, लेकिन उनमें अत्यधिक साहस और शक्ति थी। संख्या में कम होने के बावजूद वे अंग्रेज़ों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। कर्नल उनके साहस और संघर्ष की क्षमता से प्रभावित तथा चिंतित था।

प्रश्न 2. “गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।”

उत्तर — इस कथन में लेफ्टिनेंट दूर से आने वाले सवार का वर्णन करता है। घोड़े की तेज़ गति के कारण बहुत अधिक धूल उड़ रही थी, जिससे ऐसा लग रहा था जैसे बहुत बड़ा काफ़िला आ रहा हो। लेकिन ध्यान से देखने पर केवल एक ही सवार दिखाई देता है।


 

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के एक-एक पर्याय लिखिए—

शब्द

पर्यायवाची

खिलाफ़

विरुद्ध

उम्मीद

आशा

उम्दा

श्रेष्ठ

हिफ़ाज़त

सुरक्षा

बहादुर

वीर

जाँबाज़

साहसी

नफ़रत

घृणा

हमला

आक्रमण

इंतज़ार

प्रतीक्षा

मुमकिन

संभव


 

प्रश्न 2. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

1. आँखों में धूल झोंकना

वाक्य: चोर पुलिस की आँखों में धूल झोंककर भाग गया।

2. कूट-कूट कर भरना

वाक्य: उसके मन में देशभक्ति कूट-कूटकर भरी थी।

3. काम तमाम कर देना

वाक्य: सैनिकों ने दुश्मन की योजना का काम तमाम कर दिया।

4. जान बख्श देना

वाक्य: राजा ने अपराधी की जान बख्श दी।

5. हक्का-बक्का रह जाना

वाक्य: अचानक हुई घटना को देखकर वह हक्का-बक्का रह गया।


 

कारक

प्रश्न 3. निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए—

(क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।

उत्तर: की — संबंध कारक

(ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई।

उत्तर: के — संबंध कारक

(ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।

उत्तर: को — कर्म कारक
से — अपादान कारक

(घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।

उत्तर: के लिए — संप्रदान कारक
की — संबंध कारक

(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।

उत्तर: पर — अधिकरण कारक


 

क्रिया के लिए वचन में परिवर्तन

पुस्तक में दिए गए उदाहरण के अनुसार जब क्रिया का कर्ता बदलता है तो क्रिया के रूप में भी परिवर्तन हो सकता है।

उदाहरण:

सवार कारतूस माँग रहा था।
सवार ने कारतूस माँगे।

इसी प्रकार—

(क) घोड़ा पानी पी रहा था।

उत्तर: घोड़ों ने पानी पिया।

(ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।

उत्तर: बच्चे ने दशहरे का मेला देखा।

(ग) रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।

उत्तर: रॉबिनहुड ने गरीबों की मदद की।

(घ) देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

उत्तर: देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।


 

प्रश्न 5. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए—

(क)

कर्नल ने कहा, “सिपाहियों! इस पर नज़र रखो, ये किस तरफ़ जा रहा है।”

(ख)

सवार ने पूछा, “आपने इस मुकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लाव-लश्कर की क्या ज़रूरत है?”

(ग)

खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे। चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, “दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।”


 

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1. पुस्तकालय से रॉबिनहुड के साहसिक कारनामों के बारे में जानकारी हासिल कीजिए।

उत्तर / ब्लॉग के लिए जानकारी

रॉबिनहुड लोककथाओं में प्रसिद्ध एक साहसी पात्र है। उसके बारे में प्रचलित कथाओं में उसे ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो अन्याय का विरोध करता था और गरीब तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करता था।

‘कारतूस’ में कर्नल को वज़ीर अली के साहसिक कारनामे सुनकर रॉबिनहुड की याद आती है। इससे स्पष्ट होता है कि अंग्रेज़ अधिकारी वज़ीर अली को अत्यंत साहसी और चुनौतीपूर्ण व्यक्ति मानते थे।


प्रश्न 2. वृंदावनलाल वर्मा की कहानी ‘इब्राहीम गार्दी’ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए।

उत्तर

यह पठन एवं प्रस्तुतीकरण आधारित गतिविधि है। विद्यार्थियों को वृंदावनलाल वर्मा की कहानी ‘इब्राहीम गार्दी’ पढ़कर उसके कथानक और प्रमुख घटनाओं को अपनी भाषा में कक्षा में प्रस्तुत करना है।


 

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. ‘कारतूस’ एकांकी का मंचन अपने विद्यालय में कीजिए।

उत्तर / परियोजना सुझाव

‘कारतूस’ एकांकी का विद्यालय में मंचन करने के लिए विद्यार्थियों को अलग-अलग पात्रों की भूमिकाएँ दी जा सकती हैं। कर्नल, लेफ्टिनेंट, सवार/वज़ीर अली और सिपाहियों की भूमिकाएँ अलग-अलग विद्यार्थी निभा सकते हैं।

मंच पर गोरखपुर के जंगल और अंग्रेज़ी सेना के खेमे का वातावरण तैयार किया जा सकता है। संवादों के साथ मंच-निर्देशों के अनुसार पात्रों की गतिविधियों को प्रस्तुत करने से एकांकी का प्रभाव अधिक अच्छा होगा।


प्रश्न 2. ‘एकांकी’ और ‘नाटक’ में क्या अंतर है? कुछ नाटकों और एकांकियों की सूची तैयार कीजिए।

एकांकी और नाटक में अंतर

आधार

एकांकी

नाटक

अर्थ

एक अंक में समाप्त होने वाली नाट्य रचना

अनेक अंकों/दृश्यों वाली विस्तृत नाट्य रचना हो सकती है

कथानक

सामान्यतः सीमित और एक मुख्य घटना पर केंद्रित

अपेक्षाकृत विस्तृत कथानक

पात्र

सामान्यतः सीमित

अपेक्षाकृत अधिक पात्र हो सकते हैं

समय

कम समय में प्रस्तुत किया जा सकता है

प्रस्तुति अपेक्षाकृत लंबी हो सकती है

घटनाएँ

सीमित घटनाओं पर केंद्रित

अनेक घटनाएँ और प्रसंग हो सकते हैं

उदाहरण

एकांकी:

  • कारतूस
  • चरणदास चोर जैसे नाट्य-रूपों के उदाहरणों का अध्ययन किया जा सकता है।

नाटक:

  • आषाढ़ का एक दिन
  • अंधा युग
  • आधे-अधूरे

ध्यान दें: पुस्तक के परियोजना प्रश्न में मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों से ‘एकांकी’ और ‘नाटक’ का अंतर समझना तथा उदाहरणों की सूची तैयार करना है।


 

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