प्रेमचंद : बड़े भाई साहब — प्रश्न-अभ्यास (Premchand : Bade Bhai Sahab — Question Answer)

 

 

प्रेमचंद : बड़े भाई साहब (Premchand : Bade Bhai Sahab) Class 10 Hindi Sparsh

 

‘बड़े भाई साहब’ के प्रश्न-अभ्यास में सभी प्रश्नों के उत्तर यहां दिए गए हैं। उत्तर पाठ के आधार पर, सरल और परीक्षा में लिखने योग्य भाषा में रखे गए हैं। प्रश्न-अभ्यास में मौखिक, 25–30 शब्द, 50–60 शब्द, आशय-स्पष्टीकरण तथा भाषा-अध्ययन के प्रश्न दिए गए हैं।

 

📖 बड़े भाई साहब — प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

🟣 मौखिक

1. कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?

उत्तर:
कथा नायक की रुचि पढ़ाई की अपेक्षा खेल-कूद, गुल्ली-डंडा, पतंग उड़ाने और मैदान में समय बिताने में अधिक थी।


2. बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?

उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल पूछते थे—“कहाँ थे?”


3. दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर:
दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के मन में आत्मविश्वास और कुछ अभिमान आ गया। उसे लगने लगा कि वह बिना अधिक पढ़े भी पास हो सकता है और वह अधिक स्वतंत्र होकर खेलने लगा।


4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?

उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच वर्ष बड़े थे। वे उससे एक कक्षा आगे पढ़ते थे।


5. बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?

उत्तर:
बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कभी-कभी कॉपी या किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों और बिल्लियों के चित्र बनाते थे तथा शब्दों और वाक्यों को बार-बार लिखते थे।


🟢 (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर

25–30 शब्दों में

1. छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?

उत्तर:
छोटे भाई ने विषयों के अनुसार पढ़ाई का निश्चित समय तय किया और खेल-कूद को समय-सारणी से निकाल दिया। लेकिन मैदान की हरियाली और खेलों का आकर्षण उसे खींच लेता था, इसलिए वह टाइम-टेबिल का पालन नहीं कर पाया।


2. एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर:
गुल्ली-डंडा खेलने के बाद लौटने पर बड़े भाई साहब ने उसे घमंड न करने की सीख दी। उन्होंने रावण आदि के उदाहरण देकर समझाया कि केवल परीक्षा पास करना ही सफलता नहीं, बल्कि बुद्धि का विकास आवश्यक है।


3. बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?

उत्तर:
बड़े भाई साहब स्वयं को छोटे भाई का मार्गदर्शक और जिम्मेदार समझते थे। इसलिए वे खेल-कूद और मनोरंजन की अपनी इच्छाओं को दबाकर पढ़ाई और अनुशासन का आदर्श प्रस्तुत करना चाहते थे।


4. बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?

उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई को मन लगाकर पढ़ने, समय का सदुपयोग करने, खेल-कूद में समय न गँवाने और घमंड न करने की सलाह देते थे, क्योंकि वे उसके भविष्य की चिंता करते थे।


5. छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फायदा उठाया?

उत्तर:
बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार के बाद छोटे भाई की स्वतंत्रता बढ़ गई। उसने पढ़ाई कम कर दी और पतंग उड़ाने में अधिक समय लगाने लगा। वह उनकी नजर बचाकर कनकौए उड़ाता था।


🟢 (ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर

50–60 शब्दों में

1. बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर:
बड़े भाई की डाँट-फटकार का छोटे भाई पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ता था। उनके उपदेशों के कारण वह कम-से-कम अपनी पढ़ाई पूरी करने का प्रयास करता था। यद्यपि वह खेल-कूद में अधिक रुचि रखता था, फिर भी बड़े भाई की चिंता और अनुशासन ने उसे पढ़ाई के प्रति सजग रखा। इसलिए उनकी डाँट-फटकार ने उसकी सफलता में योगदान दिया।


2. इस पाठ में लेखक ने सम्पूर्ण शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?

उत्तर:
लेखक ने ऐसी शिक्षा-व्यवस्था पर व्यंग्य किया है जिसमें विद्यार्थियों से कठिन विषयों को बिना समझे रटने, अनावश्यक रूप से लंबे उत्तर लिखने और छोटी-छोटी गलतियों पर अंक काटने की अपेक्षा की जाती है। उसने परीक्षा-केंद्रित और रटंत शिक्षा की आलोचना की है। मैं लेखक के विचार से सहमत हूँ, क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि समझ और बुद्धि का विकास होना चाहिए।


3. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?

उत्तर:
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबें पढ़ने से नहीं आती, बल्कि संसार को देखने और जीवन के अनुभव प्राप्त करने से आती है। उन्होंने माता-पिता और हेडमास्टर की माँ का उदाहरण देकर बताया कि कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद उनके पास अधिक व्यावहारिक ज्ञान हो सकता है।


4. छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?

उत्तर:
बड़े भाई साहब के बार-बार समझाने और अपनी जिम्मेदारी निभाने से छोटे भाई को महसूस हुआ कि उनकी डाँट के पीछे उसका हित छिपा है। जब बड़े भाई साहब ने बताया कि वे स्वयं भी पतंग उड़ाना चाहते हैं, लेकिन छोटे भाई की रक्षा के लिए अपनी इच्छा दबाते हैं, तब उसके मन में उनके प्रति सच्ची श्रद्धा उत्पन्न हुई।


5. बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:
बड़े भाई साहब गंभीर, अनुशासनप्रिय, मेहनती, जिम्मेदार और अनुभव को महत्व देने वाले व्यक्ति हैं। वे छोटे भाई की पढ़ाई और भविष्य के प्रति चिंतित रहते हैं। वे उसे डाँटते अवश्य हैं, लेकिन उनके मन में उसके प्रति गहरा स्नेह है। साथ ही वे अपने छोटे भाई के लिए स्वयं की इच्छाओं का त्याग भी करते हैं।


6. बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है?

उत्तर:
बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव को अधिक महत्वपूर्ण माना है। उनका कहना है कि किताबी ज्ञान से अनेक विषयों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन जीवन की वास्तविक समझ संसार को देखकर और अनुभव प्राप्त करके आती है। व्यक्ति बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ प्राप्त कर ले, फिर भी व्यावहारिक अनुभव में बड़ों की बराबरी नहीं कर सकता।


7. बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि—

(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।

उत्तर:
छोटा भाई बड़े भाई साहब से डरता भी है और उनका सम्मान भी करता है। वह उनकी नजर बचाकर पतंग उड़ाता है ताकि उन्हें यह न लगे कि उसका सम्मान कम हो गया है। अंत में बड़े भाई साहब की बात सुनकर वह उनके सामने नतमस्तक हो जाता है और स्वीकार करता है कि उन्हें उसे समझाने का पूरा अधिकार है।

(ख) भाई साहब को जिंदगी का अच्छा अनुभव है।

उत्तर:
बड़े भाई साहब कहते हैं कि भले ही वे परीक्षा में फेल हो गए हों, लेकिन वे उम्र में पाँच वर्ष बड़े हैं और संसार तथा जिंदगी का उनसे अधिक अनुभव रखते हैं। वे माता-पिता और हेडमास्टर की माँ के उदाहरण देकर भी व्यावहारिक अनुभव का महत्व बताते हैं।

(ग) भाई साहब के भीतर एक बच्चा है।

उत्तर:
बड़े भाई साहब छोटे भाई को पतंग उड़ाने से रोकते हैं, लेकिन अंत में स्वयं कटी हुई पतंग की डोर पकड़कर उसके पीछे दौड़ पड़ते हैं। इससे पता चलता है कि उनके भीतर भी एक चंचल और खेल-प्रेमी बच्चा छिपा हुआ था।

(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।

उत्तर:
बड़े भाई साहब बार-बार छोटे भाई को पढ़ाई, अनुशासन और समय के सदुपयोग की सलाह देते हैं। अंत में वे स्पष्ट करते हैं कि वे अपनी इच्छाएँ इसलिए दबाते हैं ताकि छोटे भाई की रक्षा कर सकें और उसे गलत रास्ते पर जाने से रोक सकें।


🟠 (ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए

1. “इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज है बुद्धि का विकास।”

उत्तर:
बड़े भाई साहब के अनुसार केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर लेना शिक्षा की सफलता नहीं है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता का विकास करना है। यदि विद्यार्थी केवल प्रश्नों के उत्तर रटकर परीक्षा पास कर ले, लेकिन विषय का अर्थ और जीवन में उसका उपयोग न समझे, तो ऐसी शिक्षा अधूरी है।


2. “फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।”

उत्तर:
लेखक कहना चाहता है कि खेल-कूद के प्रति उसका आकर्षण इतना अधिक था कि बड़े भाई साहब की डाँट और धमकी भी उसे खेलों से दूर नहीं रख सकती थी। जिस प्रकार मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी अपने मोह-माया को नहीं छोड़ पाता, उसी प्रकार लेखक खेल-कूद के मोह को नहीं छोड़ पाता था।


3. “बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पाएदार बने?”

उत्तर:
यहाँ बड़े भाई साहब शिक्षा की तुलना मकान से करते हैं। उनका मानना है कि जिस प्रकार मजबूत मकान के लिए मजबूत नींव आवश्यक होती है, उसी प्रकार अच्छी शिक्षा के लिए विषयों की मजबूत आधारभूत समझ आवश्यक है। यदि विद्यार्थी केवल जल्दी-जल्दी कक्षाएँ पास करता जाए और उसकी बुनियाद कमजोर रहे, तो उसकी शिक्षा टिकाऊ नहीं होगी।


4. “आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।”

उत्तर:
इस पंक्ति में लेखक ने आकाश में उड़ती हुई पतंग का अत्यंत सुंदर और कल्पनात्मक वर्णन किया है। लेखक को पतंग किसी आकाशीय यात्री जैसी दिखाई देती है, जो धीरे-धीरे धरती की ओर आ रही है। उसकी कल्पना पतंग को एक ऐसी आत्मा के रूप में देखती है जो स्वर्ग से उतरकर नए अनुभव प्राप्त करने जा रही हो।


🟣 भाषा-अध्ययन

1. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।

शब्द

पर्यायवाची

नसीहत

सीख, उपदेश

रोग

बीमारी, व्याधि

राज

शासन, राज्य

तजुरबा

अनुभव, अनुभूति


2. मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

1. सिर पर नंगी तलवार लटकना

वाक्य: परीक्षा के समय विद्यार्थियों के सिर पर असफलता की नंगी तलवार लटकती रहती है।

2. आड़े हाथों लेना

वाक्य: गलती करने पर अध्यापक ने छात्र को आड़े हाथों लिया।

3. अंधे के हाथ बटेर लगना

वाक्य: बिना मेहनत के प्रथम आ जाना उसके लिए अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा था।

4. लोहे के चने चबाना

वाक्य: कठिन परीक्षा पास करना लोहे के चने चबाने जैसा है।

5. दाँतों पसीना आना

वाक्य: कठिन गणित के प्रश्न हल करते समय विद्यार्थियों के दाँतों पसीना आ गया।

6. एक-एक रेशे निचोड़ना

वाक्य: माँ ने घर चलाने के लिए अपनी बचत का एक-एक रेशा निचोड़ दिया।


🟢 3. तत्सम, तद्भव, देशज और आगत शब्द

पाठ में आए शब्दों को इस प्रकार समझा जा सकता है:

तत्सम शब्द

जो शब्द संस्कृत से बिना परिवर्तन के हिंदी में आए हैं।

उदाहरण:

  • जन्म
  • मुख
  • विद्या
  • बुद्धि
  • समय
  • प्रातःकाल

तद्भव शब्द

जो संस्कृत से परिवर्तित होकर हिंदी में आए हैं।

उदाहरण:

  • आँख — अक्षि से
  • दाँत — दंत से
  • दूध — दुग्ध से
  • हाथ — हस्त से

देशज शब्द

जो स्थानीय/लोकभाषाओं से हिंदी में आए हैं।

उदाहरण:

  • गुल्ली
  • डंडा
  • कनकौआ
  • कन्ने

आगत शब्द

जो दूसरी भाषाओं से हिंदी में आए हैं।

उदाहरण:

  • पोजीशन
  • फ़जीहत
  • टाइम-टेबिल
  • कंपोजीशन
  • ग्रामर

🟢 4. सकर्मक और अकर्मक क्रिया

सकर्मक क्रिया

जिस क्रिया के साथ कर्म की आवश्यकता होती है।

उदाहरण:
“उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया।”
यहाँ ‘पकड़ लिया’ सकर्मक क्रिया है क्योंकि इसका कर्म ‘हाथ’ है।

अकर्मक क्रिया

जिस क्रिया के साथ कर्म की आवश्यकता नहीं होती।

उदाहरण:
“फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा।”
यहाँ ‘कटने लगा’ अकर्मक क्रिया है।

अभ्यास के उत्तर

वाक्य

क्रिया

(क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया।

सकर्मक

(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा।

अकर्मक

(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा।

सकर्मक

(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता।

अकर्मक

(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो।

सकर्मक

(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।

अकर्मक

 


🟢 5. ‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए

मूल शब्द

‘इक’ लगाकर

विचार

विचारिक

इतिहास

ऐतिहासिक

संसार

सांसारिक

दिन

दैनिक

नीति

नैतिक

प्रयोग

प्रायोगिक

अधिकार

अधिकारिक

नोट: इस अभ्यास में कुछ शब्दों में ‘इक’ प्रत्यय लगाते समय मूल शब्द का रूप बदल जाता है, जैसे इतिहास → ऐतिहासिक, नीति → नैतिक, दिन → दैनिक।


📚 योग्यता-विस्तार

यह भाग सामान्य प्रश्नों की तरह निश्चित उत्तर वाला नहीं है, बल्कि कक्षा-गतिविधि/चर्चा के लिए है। पुस्तक में प्रेमचंद की कहानियों को पढ़ने और “शिक्षा रटंत विद्या नहीं है” विषय पर परिचर्चा आयोजित करने के सुझाव दिए गए हैं।

1. प्रेमचंद की कहानियों का मंचन

सुझाव:
विद्यार्थी प्रेमचंद की किसी कहानी जैसे ‘ईदगाह’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘पूस की रात’ या ‘कफन’ का चयन करके उसके पात्रों का अभिनय कर सकते हैं। इससे कहानी को समझने के साथ-साथ संवाद-अभिनय की क्षमता का भी विकास होगा।

2. “शिक्षा रटंत विद्या नहीं है” — परिचर्चा

पक्ष में तर्क:
शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि विद्यार्थी की समझ, तर्कशक्ति, रचनात्मकता और व्यवहारिक ज्ञान का विकास करना है। केवल रटकर प्राप्त किया गया ज्ञान लंबे समय तक उपयोगी नहीं रहता।

निष्कर्ष:
इसलिए शिक्षा में समझ, अनुभव, प्रयोग और व्यवहारिक ज्ञान को रटने की अपेक्षा अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।


🟠 परियोजना कार्य

पुस्तक में परियोजना के रूप में जीवन के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाए तथा छात्रावास में रहने वाले छोटे भाई/बहन को पत्र लिखने जैसे कार्य दिए गए हैं।

परियोजना–1 के लिए निष्कर्ष

जीवन के अनुभव और किताबी ज्ञान दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है। किताबी ज्ञान हमें विषयों की जानकारी देता है, जबकि जीवन का अनुभव उस ज्ञान को व्यवहार में प्रयोग करना सिखाता है। इसलिए केवल किताबों या केवल अनुभव पर निर्भर रहने के बजाय दोनों का संतुलित होना आवश्यक है।

परियोजना–2 : छोटे भाई/बहन को पत्र

प्रिय छोटे भाई,

आशा है तुम छात्रावास में अच्छी तरह रह रहे होगे। अपनी पढ़ाई पर नियमित रूप से ध्यान देना और समय-सारणी बनाकर उसका पालन करना। पढ़ाई के साथ खेल-कूद और मनोरंजन के लिए भी थोड़ा समय अवश्य निकालना। किसी कठिनाई का सामना हो तो घबराना नहीं, बल्कि अपने अध्यापकों और बड़ों से सलाह लेना।

स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना और अपने समय तथा पैसों का सही उपयोग करना। मुझे विश्वास है कि तुम मेहनत और अनुशासन के साथ पढ़ाई करोगे तथा जीवन के अनुभवों से भी सीखते रहोगे।

तुम्हारा भाई


 

⭐ परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न

अगर इस अध्याय से कम समय में तैयारी करनी हो, तो इन प्रश्नों को विशेष रूप से तैयार करना चाहिए:

1.   बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।

2.   बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?

3.   छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?

4.   इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज है बुद्धि का विकास — आशय स्पष्ट कीजिए।

5.   इस पाठ में लेखक ने शिक्षा-व्यवस्था के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है?

6.   बड़े भाई साहब जिंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?

7.   भाई साहब के भीतर एक बच्चा है — पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

8.   बड़े भाई साहब और छोटे भाई के स्वभाव की तुलना कीजिए।

9.   ‘बड़े भाई साहब’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

10.               कहानी के अंत में पतंग का प्रसंग किस उद्देश्य से आया है?

 


 🎯 प्रेमचन्द - जीवन परिचय 

🎯 प्रेमचन्द - बडे भाई साहब,प्रसंग, व्याख्या, कठिन शब्दार्थ 

🎯 प्रेमचन्द - बडे भाई साहब, प्रश्न - उत्तर 

🎯 प्रेमचन्द - बडे भाई साहब, पूरा पाठ 




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