सीताराम सेकसरिया — जीवन परिचय (Sitaram Seksaria — Jeevan Parichay)
सीताराम सेकसरिया — डायरी का एक पन्ना (Sitaram Seksaria — Diary Ka Ek Panna) Class 10 Hindi
✍️ सीताराम सेकसरिया : जीवन परिचय
सीताराम सेकसरिया हिंदी साहित्य के ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने साहित्य के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनका जन्म 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ था। उनके जीवन का अधिकांश समय कलकत्ता (कोलकाता) में बीता।
व्यापार-व्यवसाय से जुड़े होने के बावजूद सीताराम सेकसरिया का साहित्य और समाज-सेवा के प्रति गहरा लगाव था। वे अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और नारी-शिक्षण संस्थाओं के प्रेरक, संस्थापक और संचालक रहे। इस प्रकार उन्होंने केवल साहित्य के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महात्मा गांधी के आह्वान पर वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए। वे गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के निकट रहे। सत्याग्रह आंदोलन के दौरान उन्होंने जेल-यात्रा भी की। कुछ समय तक वे आजाद हिंद फ़ौज के मंत्री भी रहे।
भारत सरकार ने उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1962 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।
सीताराम सेकसरिया को विद्यालयी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने स्वाध्याय से पढ़ना-लिखना सीखा। उनके जीवन की यह विशेषता बताती है कि औपचारिक शिक्षा के अभाव के बावजूद व्यक्ति अपने प्रयास और लगन से ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
उनकी उल्लेखनीय कृतियों में ‘स्मृतिकण’, ‘मन की बात’, ‘बीता युग’, ‘नयी याद’ और ‘दो भागों में एक कार्यकर्ता की डायरी’ प्रमुख हैं। ‘डायरी का एक पन्ना’ उनकी डायरी-लेखन शैली का महत्वपूर्ण अंश है।
📚 डायरी का एक पन्ना पाठ का परिचय
‘डायरी का एक पन्ना’ सीताराम सेकसरिया की डायरी का एक अंश है। इसमें 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस का आँखों देखा वर्णन मिलता है।
इस दिन अंग्रेज़ी शासन के विरोध में लोगों ने बड़े उत्साह के साथ राष्ट्रीय झंडा फहराया, जुलूस निकाले और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा की। अंग्रेज़ सरकार ने इस आयोजन को रोकने के लिए भारी पुलिस बल लगाया था।
पुलिस ने लोगों पर लाठियाँ चलाईं, अनेक लोगों को गिरफ्तार किया और कई लोग घायल हुए। इसके बावजूद स्त्रियों, विद्यार्थियों और अन्य देशभक्तों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
इस पाठ के माध्यम से उस समय के राष्ट्रीय उत्साह, देशभक्ति, अंग्रेज़ी शासन के दमन और स्वतंत्रता सेनानियों के साहस का सजीव चित्र सामने आता है।
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