लीलाधर मंडलोई : तताँरा-वामीरो कथा — भावार्थ, प्रसंग, विस्तृत व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ (Leeladhar Mandloi : Tantara Vamiro Katha, Bhawarth, Prasang, Vyakhya, Kathin Shabdo ke Arth)
📖लीलाधर मंडलोई — तताँरा-वामीरो कथा (Leeladhar Mandloi — Tantara Vamiro Katha) Class 10 Hindi Sparsh
📖 तताँरा-वामीरो कथा
लेखक — लीलाधर मंडलोई
कक्षा 10 हिंदी — स्पर्श
📜 गद्यांश–1
तताँरा का परिचय
मूल पाठ
अंडमान द्वीपसमूह का अंतिम दक्षिणी द्वीप है लिटिल अंडमान। यह पोर्ट ब्लेयर से लगभग सौ किलोमीटर दूर स्थित है। इसके बाद निकोबार द्वीपसमूह की श्रृंखला आरंभ होती है जो निकोबारी जनजाति की आदि संस्कृति के केंद्र हैं। निकोबारी द्वीपसमूह का पहला प्रमुख द्वीप है कार-निकोबार जो लिटिल अंडमान से 96 कि.मी. दूर है। निकोबारियों का विश्वास है कि प्राचीन काल में ये दोनों द्वीप एक ही थे।
सदियों पूर्व, जब लिटिल अंडमान और कार-निकोबार आपस में जुड़े हुए थे तब वहाँ एक सुंदर-सा गाँव था। पास में एक सुंदर और शक्तिशाली युवक रहता था। उसका नाम था तताँरा। निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे। तताँरा एक नेक और मददगार व्यक्ति था। सदैव दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहता। अपने गाँववालों को ही नहीं, अपितु समुद्रद्वीपवासियों की सेवा करना अपना परम कर्तव्य समझता।
उसके नेक व्यक्तित्व का आज भी उसका आदर था। वह अपनी तत्परता के लिए प्रसिद्ध था। जो भी व्यक्ति किसी संकट में पड़ता था वह उसे स्मरण करता और वह भागा-भागा वहाँ पहुँच जाता। दूसरे गाँवों में भी पर्व-त्योहारों के समय उसे विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता। उसका व्यक्तित्व तो आकर्षक था ही, साथ ही आत्मीय स्वभाव की वजह से लोग उसके करीब रहना चाहते।
पारंपरिक पोशाक के साथ वह अपनी कमर में सदैव एक लकड़ी की तलवार बाँधे रखता था। यह तलवार अद्भुत ढंग से लकड़ी की बनी होने पर भी उसमें अद्भुत दैवीय शक्ति थी। तताँरा अपनी तलवार को कभी अलग न होने देता। उसका दूसरों के सामने उपयोग भी न करता। किंतु उसके चर्चित साहसिक कारनामों के कारण लोग-बाग तलवार में अद्भुत शक्ति का होना मानते थे। तताँरा की तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।
एक शाम तताँरा दिनभर के अथक परिश्रम के बाद समुद्र किनारे टहलने निकला पड़ा। सूरज समुद्र से लेने की तरह डूबने को था। समुद्र से उठी बयारें आ रही थीं। लहरियाँ चहचहाहटें शनेः-शनेः क्षीण होने को थीं। उसका मन शांत था। विचारमग्न तताँरा समुद्री बालू पर बैठकर सूरज की अंतिम रंग-बिरंगी किरणों को समुद्र पर निहारने लगा। तभी कहीं पास से उसे मधुर गीत गूँजता सुनाई दिया। गीत मानो बहता हुआ उसकी तरफ आ रहा हो। बीच-बीच में लहरों का संगीत सुनाई पड़ता था। गीत इतना सुस्पष्ट और प्रभावी था कि वह अपने-आप खिंचा चला गया। एक पल वह रुका और पुनः कदम बढ़ाया।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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द्वीपसमूह |
अनेक द्वीपों का समूह |
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आदि संस्कृति |
प्राचीन संस्कृति |
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श्रृंखला |
क्रम से जुड़े हुए समूह |
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निकोबारी |
निकोबार द्वीपसमूह में रहने वाली जनजाति |
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शक्तिशाली |
बलवान |
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नेक |
अच्छा, सज्जन |
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तत्पर |
तैयार |
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परम कर्तव्य |
सबसे बड़ा कर्तव्य |
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आत्मीय |
अपनापन रखने वाला |
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पारंपरिक |
परंपरा से संबंधित |
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दैवीय |
ईश्वर से संबंधित |
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विलक्षण |
असाधारण, अनोखा |
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अथक |
बिना थके किया गया |
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बयार |
हवा |
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विचारमग्न |
विचारों में डूबा हुआ |
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बालू |
रेत |
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सुस्पष्ट |
बिल्कुल स्पष्ट |
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प्रभावी |
असरदार |
📌 प्रसंग
प्रस्तुत गद्यांश लीलाधर मंडलोई द्वारा रचित ‘तताँरा-वामीरो कथा’ से लिया गया है। इसमें लेखक ने निकोबार द्वीपसमूह, वहाँ के जनजीवन तथा तताँरा के चरित्र का परिचय दिया है। साथ ही तताँरा के नेक, मददगार और साहसी व्यक्तित्व तथा उसकी रहस्यमयी तलवार का वर्णन किया गया है।
📝 सरल अर्थ
लेखक बताता है कि लिटिल अंडमान के बाद निकोबार द्वीपसमूह शुरू होता है। निकोबारियों की मान्यता थी कि प्राचीन समय में लिटिल अंडमान और कार-निकोबार एक ही द्वीप थे।
बहुत पहले वहाँ एक सुंदर गाँव था। उस गाँव में तताँरा नाम का एक सुंदर और शक्तिशाली युवक रहता था। वह बहुत नेक और मददगार था। वह केवल अपने गाँव के लोगों की ही नहीं, बल्कि दूसरे द्वीपों के लोगों की भी सहायता करता था।
किसी व्यक्ति पर संकट आने पर लोग तताँरा को याद करते और वह तुरंत उसकी सहायता के लिए पहुँच जाता। दूसरे गाँवों के लोग भी उसे अपने पर्व-त्योहारों में विशेष रूप से बुलाते थे। उसके आकर्षक व्यक्तित्व और आत्मीय स्वभाव के कारण लोग उसे बहुत पसंद करते थे।
तताँरा हमेशा अपनी कमर में लकड़ी की तलवार बाँधे रखता था। लोगों का विश्वास था कि उस साधारण दिखाई देने वाली लकड़ी की तलवार में अद्भुत दैवीय शक्ति थी। वह तलवार को अपने से कभी अलग नहीं करता था और दूसरों के सामने उसका प्रयोग भी नहीं करता था।
एक शाम दिनभर के परिश्रम के बाद तताँरा समुद्र के किनारे घूमने गया। सूर्य अस्त होने वाला था। समुद्र की हवाएँ और लहरों की आवाज़ वातावरण को शांत बना रही थीं। तभी उसे पास से एक मधुर गीत सुनाई दिया। उस गीत ने तताँरा को इतना आकर्षित किया कि वह उसकी ओर खिंचा चला गया।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- लिटिल अंडमान के बाद निकोबार द्वीपसमूह की शुरुआत होती है।
- कार-निकोबार निकोबारी संस्कृति का प्रमुख केंद्र बताया गया है।
- तताँरा एक सुंदर, शक्तिशाली, नेक और मददगार युवक था।
- वह लोगों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता था।
- तताँरा की लकड़ी की तलवार को लोग दैवीय शक्ति से युक्त मानते थे।
- समुद्र किनारे उसे पहली बार मधुर गीत सुनाई देता है।
- यही गीत आगे वामीरो से उसके मिलन का कारण बनता है।
📜 गद्यांश–2
तताँरा और वामीरो का प्रथम मिलन
मूल पाठ
गीत के स्वर बह रहे थे। वह विकल-सा उस तरफ बढ़ता गया। अंततः उसकी नजर एक युवती पर पड़ी जो हल्की हुई शाम के सौंदर्य में बेसुध, एकाएक समुद्र की देह पर डूबते आकर्षक रंगों को निहारता हुआ गीत गा रही थी। वह एक सुंदर गीत था।
उसे ज्ञात ही न हो सका कि कोई अनजाना युवक उसे निःशब्द ताके जा रहा है। एकाएक एक ऊँची लहर उठी और उसे भिगो गई। वह हड़बड़ाहट में गाना भूल गई। इसके पहले कि वह सामान्य हो पाती, उसने अपने कानों में गूँजती गंभीर आकर्षक आवाज सुनी।
“तुमने एकाएक इतना मधुर गाना क्यों छोड़ दिया?” तताँरा ने विनम्रतापूर्वक कहा। अपने सामने एक सुंदर युवक को देखकर वह विस्मित हुई। उसके भीतर किसी कोमल भावना का संचार हुआ किंतु अपने संयत स्वर में उसने बेरुखी के साथ जवाब दिया।
“पहले बताओ! तुम कौन हो, इस तरह मुझे घूरने और इस असंगत प्रश्न का कारण? अपने गाँव के अलावा किसी और गाँव के युवक के प्रश्नों का उत्तर देने को मैं बाध्य नहीं। यह तुम भी जानते हो।”
तताँरा मानो सम्मोहित था। उसके कानों में युवती की आवाज ठीक से पहुँच न सकी। उसने पुनः विनय की, “तुमने गाना क्यों रोक दिया? गाओ न?”
युवती उखड़ती हुई झुँझलाई, अंततः उसने निश्चयपूर्वक एक बार पुनः लगभग विरोध करते हुए कड़े स्वर में कहा।
“ढीठता की हद है। मैं जब से परिचय पूछ रही हूँ और तुम बस एक ही राग अलाप रहे हो। गीत गाओ-गीत गाओ, आखिर क्यों? क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम?”
इतना बोलकर वह जाने के लिए तेजी से मुड़ी। तताँरा को मानो कुछ होश आया। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। वह उसके सामने रोककर, लगभग गिड़गिड़ाने लगा।
“मुझे माफ कर दो। जीवन में पहली बार मैं इस तरह विचलित हुआ हूँ। तुम्हें देखकर मेरी चेतना लुप्त हो गई थी। मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा। बस अपना नाम बता दो।”
तताँरा ने विवशता में आग्रह किया। उसकी आँखें युवती के चेहरे पर केंद्रित थीं। उसके चेहरे पर सच्ची विनय थी।
“वा... मी... रो...” एक रस घोलती आवाज उसके कानों में पहुँची।
“वामीरो... वामी... रो... वाह कितना सुंदर नाम है। कल भी आओगी न यहाँ?” तताँरा ने याचना भरे स्वर में कहा।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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विकल |
बेचैन |
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बेसुध |
बेहोशी जैसी अवस्था में, सुध-बुध खोए हुए |
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निहारना |
ध्यान से देखना |
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अनजाना |
अपरिचित |
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निःशब्द |
बिना आवाज़ के |
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विस्मित |
हैरान |
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कोमल भावना |
प्रेम/स्नेह की भावना |
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संयत |
नियंत्रित |
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बेरुखी |
उदासीनता |
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असंगत |
अनुचित, जिसका मेल न हो |
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बाध्य |
मजबूर |
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सम्मोहित |
मोहित |
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विनय |
नम्र निवेदन |
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ढीठता |
निर्लज्जता |
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विचलित |
व्याकुल |
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विवशता |
मजबूरी |
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याचना |
विनती |
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रस घोलती |
मधुर प्रभाव डालने वाली |
📌 प्रसंग
इस गद्यांश में लेखक ने तताँरा और वामीरो की पहली मुलाकात का वर्णन किया है। तताँरा समुद्र के किनारे एक युवती को मधुर गीत गाते हुए देखता है। वह युवती वामीरो है।
📝 सरल अर्थ
समुद्र के किनारे तताँरा को एक मधुर गीत सुनाई देता है। वह गीत की ओर बढ़ता है और उसे एक सुंदर युवती दिखाई देती है। वह युवती समुद्र के सुंदर दृश्य को देखते हुए गीत गा रही थी।
तताँरा उसे चुपचाप देखने लगता है। तभी समुद्र की एक ऊँची लहर आती है और युवती को भिगो देती है। वह अचानक अपना गीत भूल जाती है। तभी तताँरा उससे पूछता है कि उसने इतना मधुर गीत क्यों रोक दिया।
युवती तताँरा को देखकर आश्चर्यचकित होती है और उससे पूछती है कि वह कौन है तथा उसे इस प्रकार क्यों देख रहा है। वह अपने गाँव की परंपरा का हवाला देते हुए कहती है कि उसे दूसरे गाँव के युवक के प्रश्नों का उत्तर देने की बाध्यता नहीं है।
तताँरा उस युवती के आकर्षण से इतना प्रभावित था कि उसकी बातें ठीक से सुन भी नहीं पाया। वह बार-बार उससे गीत गाने के लिए कहता है। युवती नाराज़ होकर उसे गाँव के नियम की याद दिलाती है।
जब युवती वहाँ से जाने लगती है तो तताँरा को अपनी गलती का एहसास होता है। वह उससे माफी माँगता है और केवल उसका नाम बताने का आग्रह करता है।
तब युवती अपना नाम बताती है—वामीरो।
वामीरो का नाम सुनकर तताँरा बहुत प्रभावित होता है और उससे अगले दिन फिर वहाँ आने का आग्रह करता है।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- तताँरा पहली बार वामीरो को समुद्र किनारे देखता है।
- वामीरो बहुत मधुर गीत गा रही थी।
- तताँरा उसके सौंदर्य और आवाज़ से प्रभावित हो जाता है।
- वामीरो अपने गाँव की परंपरा से परिचित थी।
- तताँरा अपनी गलती स्वीकार कर वामीरो से माफी माँगता है।
- पहली मुलाकात में ही दोनों के बीच आकर्षण उत्पन्न होता है।
- वामीरो अपना नाम बताती है।
📜 गद्यांश–3
प्रेम की शुरुआत और प्रतीक्षा
मूल पाठ
“नहीं... शायद... कभी नहीं।” वामीरो ने अयत्नपूर्वक कहा और झटके से लपाती की तरफ़ मुड़ गई। पीछे तताँरा के बचा गूँज रहे थे।
“वामीरो... मेरे नाम तातारा को कल में इसी चट्टान पर प्रतीक्षा करूँगा... तुम्हारी बाट जोहूँगा... जरूर आना...”
वामीरो रुकी नहीं, भागती ही गई। तताँरा उसे जाते हुए निहारता रहा।
वामीरो घर पहुँचकर भीतर ही भीतर कुछ बेचैनी महसूस करने लगी। उसके भीतर तताँरा से मूक होने की एक लहर उठी थी। एक उत्सुकता थी। तताँरा बार-बार उसके मन के सामने आता था। उसकी आँखों में एक स्नेहिल आग्रह तैरता रहता। वामीरो ने तताँरा के बारे में कई कहानियाँ सुन रखी थीं। उसकी कल्पना में वह एक अद्भुत साहसी युवक था। किंतु वही तताँरा उसके सम्मुख एक अलग रूप में आया। सुंदर, बलिष्ठ किंतु बेहद शांत और भोला। उसका वास्तविक वर्णन कैसा ही था जैसा वह अपने जीवन-साथी के बारे में सोचती रही थी। किंतु एक दूसरे गाँव के युवक के साथ यह संबंध परंपरा के विरुद्ध था। अतः उसने उसे भूल जाना ही श्रेयकर समझा। किंतु यह असंभव जान पड़ा। तताँरा बार-बार उसकी आँखों के सामने था। निमिषभर पलक झपकती की तरह प्रतीक्षा में डूबी हुई।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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अयत्नपूर्वक |
बिना विशेष प्रयास के |
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चट्टान |
पत्थर की बड़ी शिला |
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बाट जोहना |
प्रतीक्षा करना |
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बेचैनी |
व्याकुलता |
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मूक |
मौन |
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उत्सुकता |
जानने की इच्छा |
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स्नेहिल |
प्रेमपूर्ण |
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बलिष्ठ |
मजबूत |
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भोला |
सरल स्वभाव वाला |
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जीवन-साथी |
पति/पत्नी |
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श्रेयकर |
अधिक उचित |
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निमिषभर |
बहुत थोड़े समय के लिए |
📌 प्रसंग
इस गद्यांश में लेखक ने वामीरो के मन में तताँरा के प्रति उत्पन्न प्रेम और आकर्षण का वर्णन किया है। साथ ही उनके प्रेम के सामने उपस्थित सामाजिक परंपरा की बाधा को भी बताया गया है।
📝 सरल अर्थ
वामीरो तताँरा के बार-बार आग्रह के बावजूद यह निश्चित नहीं करती कि वह अगले दिन आएगी। वह वहाँ से चली जाती है। तताँरा उसे अगले दिन उसी स्थान पर मिलने की प्रतीक्षा करने की बात कहता है।
घर पहुँचने के बाद वामीरो के मन में भी बेचैनी पैदा हो जाती है। तताँरा बार-बार उसकी आँखों के सामने दिखाई देने लगता है। उसने उसके बारे में पहले से बहुत-सी बातें सुन रखी थीं। उसके मन में तताँरा एक साहसी युवक के रूप में था, लेकिन सामने आने पर वह उसे सुंदर, बलवान, शांत और भोला दिखाई दिया।
वामीरो को महसूस हुआ कि तताँरा वैसा ही है जैसा वह अपने जीवन-साथी के बारे में सोचती रही थी। लेकिन एक समस्या थी—तताँरा दूसरे गाँव का युवक था और दूसरे गाँव में विवाह करना उनकी परंपरा के विरुद्ध था।
वामीरो ने सोचा कि उसे तताँरा को भूल जाना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई। तताँरा लगातार उसके मन में बना रहा।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- वामीरो के मन में भी तताँरा के प्रति आकर्षण उत्पन्न हुआ।
- वामीरो ने तताँरा को साहसी, सुंदर, बलिष्ठ और शांत पाया।
- तताँरा उसके आदर्श जीवन-साथी जैसा लगा।
- दोनों के प्रेम में सबसे बड़ी बाधा गाँव की परंपरा थी।
- वामीरो तताँरा को भूलना चाहती थी, लेकिन भूल नहीं पाई।
📜 गद्यांश–4
प्रेम, प्रतीक्षा और सामाजिक बंधन
मूल पाठ
किसी तरह रात बीती। दोनों के हृदय व्यथित थे। किसी तरह औपचारिक एक ठंडा और उजास दिन गुज़रने लगा। शाम होते ही तताँरा के लिए जीवन की अधीरता की घड़ियाँ शुरू हुईं। उसके गंभीर और शांत जीवन में ऐसा पहली बार हुआ था। वह अचंभित था, साथ ही रोमांचित भी। दिन ढलने के काफी पहले वह लपाती की उस समुद्री चट्टान पर पहुँच गया। वामीरो की प्रतीक्षा में एक-एक पल पहाड़ की तरह भारी था। उसके भीतर एक आशंका भी दौड़ रही थी। अगर वामीरो न आई तो? वह कुछ निर्णय नहीं कर पा रहा था। सिर्फ प्रतीक्षा था। बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की लहरों की तरह उठती और कभी डूबती। कभी वह टहलता, कभी वह लपाती के रास्ते पर नजरें दौड़ाता। सहसा नारियल के झुरमुटों में उसे एक आकृति कुछ साफ हुई... कुछ और... कुछ और उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। सचमुच वह वामीरो थी। लगा जैसे वह घबराहट में थी। वह अपनी ही धुन में बड़ी रही थी। बीच-बीच में इधर-उधर दृष्टि दौड़ाना न भूलती। फिर तेज कदमों से चलती हुई तताँरा के सामने आकर रुक गई। दोनों आमने-सामने थे। कुछ क्षण को दोनों के भीतर वह क्षण था। एकटक निहारते हुए वे जाने कब तक खड़े रहे। सूरज की किरणों में कहीं खो गया था। अँधेरा बढ़ रहा था। अचानक वामीरो कुछ सोचती हुई घर की तरफ दौड़ पड़ी। तताँरा अब भी वहीं खड़ा था... निश्चल... शब्दहीन...
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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व्यथित |
दुखी/परेशान |
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औपचारिक |
सामान्य रूप से किया जाने वाला |
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उजास |
प्रकाश |
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अधीरता |
बेचैनी |
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अचंभित |
आश्चर्यचकित |
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रोमांचित |
अत्यधिक उत्साहित |
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आशंका |
भय/संदेह |
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आकृति |
आकार/रूप |
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झुरमुट |
पेड़-पौधों का घना समूह |
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एकटक |
लगातार एक ही जगह देखते हुए |
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निश्चल |
बिना हिले |
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शब्दहीन |
जिसके पास कहने को शब्द न हों |
📌 प्रसंग
इस गद्यांश में लेखक ने तताँरा की वामीरो के लिए प्रतीक्षा और दोनों के पुनर्मिलन का भावपूर्ण वर्णन किया है।
📝 सरल अर्थ
रात किसी तरह बीतती है। दोनों एक-दूसरे के बारे में सोचते रहते हैं। अगले दिन तताँरा को वामीरो से मिलने की बहुत बेचैनी रहती है। शाम होने से काफी पहले ही वह समुद्र की चट्टान पर पहुँच जाता है।
वामीरो के आने की प्रतीक्षा में उसे हर पल बहुत लंबा लगता है। उसके मन में यह डर भी था कि कहीं वामीरो आए ही न। फिर भी उसके मन में उम्मीद बनी हुई थी।
अचानक उसे नारियल के पेड़ों के बीच एक आकृति दिखाई देती है। धीरे-धीरे उसे पता चलता है कि वह वामीरो है। वामीरो भी कुछ घबराई हुई वहाँ पहुँचती है।
दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े होकर काफी देर तक एक-दूसरे को देखते रहते हैं। शाम ढल जाती है और अँधेरा बढ़ने लगता है। अचानक वामीरो घर की ओर दौड़ पड़ती है, जबकि तताँरा वहीं खड़ा रह जाता है।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- तताँरा वामीरो की प्रतीक्षा में बहुत व्याकुल था।
- वामीरो भी उससे मिलने आती है।
- दोनों कुछ समय तक मौन होकर एक-दूसरे को देखते रहते हैं।
- उनके प्रेम में गहरी भावनात्मकता दिखाई देती है।
- वामीरो अचानक घर लौट जाती है।
📜 गद्यांश–5
दोनों का मिलना और प्रेम
मूल पाठ
दोनों रोज उसी जगह पहुँचते और मुग्ध होकर एक-दूसरे को निहारते रहते। बस भीतर समर्पण था। जो अनवरत जाग रहा था। एक हाथ एक वायु ने उस प्रेम को भाँप लिया और खुशबू की तरह वह उठी। वामीरो लपाती ग्राम की थी और तताँरा पासा का। दोनों का संबंध संभव न था। रीति अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था। वामीरो और तताँरा को समझाने-बुझाने के कई प्रयास हुए किंतु दोनों अडिग रहे। वे नियमित: लपाती के उसी समुद्री किनारे पर मिलते रहे। अपना कोई मतलब नहीं था।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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मुग्ध |
मोहित |
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निहारना |
ध्यान से देखना |
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समर्पण |
पूर्ण रूप से अपने को अर्पित करना |
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अनवरत |
लगातार |
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रीति |
परंपरा |
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अडिग |
अपने निर्णय पर दृढ़ |
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नियमित |
लगातार/निश्चित रूप से |
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समझाने-बुझाने |
समझाकर मनाने के प्रयास |
📌 प्रसंग
इस अंश में लेखक ने तताँरा और वामीरो के प्रेम के दृढ़ होने तथा सामाजिक परंपरा द्वारा उनके प्रेम का विरोध किए जाने का वर्णन किया है।
📝 सरल अर्थ
तताँरा और वामीरो रोज समुद्र के किनारे मिलने लगे। वे एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न होते और उनके बीच प्रेम लगातार गहरा होता गया।
लेकिन दोनों अलग-अलग गाँवों के रहने वाले थे। वामीरो लपाती गाँव की और तताँरा पासा गाँव का था। उनके समाज की परंपरा के अनुसार विवाह के लिए दोनों का एक ही गाँव का होना आवश्यक था।
लोगों ने दोनों को समझाने और अलग करने के कई प्रयास किए, लेकिन दोनों अपने प्रेम से पीछे नहीं हटे। वे नियमित रूप से उसी समुद्री किनारे पर मिलते रहे।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- तताँरा और वामीरो का प्रेम गहरा हो गया।
- दोनों रोज समुद्र किनारे मिलने लगे।
- वामीरो लपाती गाँव की थी।
- तताँरा पासा गाँव का था।
- सामाजिक परंपरा के कारण उनका विवाह संभव नहीं था।
- दोनों ने समाज के दबाव के बावजूद अपने प्रेम को नहीं छोड़ा।
📜 गद्यांश–6
गाँव का पशु-पर्व और वामीरो का आना
मूल पाठ
कुछ समय बाद पासा गाँव में ‘पशु-पर्व’ का आयोजन हुआ। पशु-पर्व में हृष्ट-पुष्ट पशुओं के प्रदर्शन के अतिरिक्त पशुओं से युवकों की शक्ति परीक्षा प्रतियोगिता भी होती है। वर्ष में एक बार सभी गाँव के लोग हिस्सा लेते हैं। बाद में नृत्य-संगीत और भोजन का भी आयोजन होता है। शाम से सभी लोग पासा में एकत्रित होने लगे। धीरे-धीरे विभिन्न कार्यक्रम शुरू हुए। तताँरा का मन इन कार्यक्रमों में न था। उसका ध्यान वामीरो की खोज में था। उसकी उत्सुकता और बेचैनी बढ़ती जा रही थी। नारियल के झुरमुटों के पीछे से उसे जैसे कोई झाँकता दिखा। उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। वह वामीरो थी जो भयवश सामने आने में झिझक रही थी। उसकी आँखें तरल थीं। होंठ काँप रहे थे। तताँरा को देखते ही वह फूटकर रोने लगी। तताँरा विह्वल हुआ। उससे कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था। रोने की आवाज लगातार ऊँची होती जा रही थी। तताँरा किंकर्तव्यविमूढ़ था। वामीरो के रुदन स्वर में एक अजीब-सी लाचारी की वेदना और करुणा थी। इस बीच गाँव के लोग भी वहाँ पहुँच गए। वामीरो की माँ क्रोध में उठी। उसने तताँरा को तरह-तरह से अपमानित किया। गाँव के लोग भी तताँरा के विरोध में आवाजें उठाने लगे। यह तताँरा के लिए असहनीय था। वामीरो अब भी रोए जा रही थी। तताँरा को गुस्सा आ रहा था। उसे यह विवाह की निषेध परंपरा पर क्रोध था। वहाँ अपनी असहायता पर चिढ़ा। अपनी इस घटना पर कोई निश्चय नहीं था कि क्या कदम उठाना चाहिए? अनायास उसका हाथ तलवार की मूठ पर टिका। क्रोध में उसने तलवार निकाली और कुछ विचार करता रहा। क्रोध लगातार अग्नि की तरह बढ़ रहा था। लोग सहम उठे। एक सन्नाटा-सा खिंच गया। जब कोई राह न सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमें शक्ति भर उठी। उसने तलवार को अपनी ओर खींचा और तब पहाड़ दो टुकड़े हो गया। पहाड़ पर लकीर खिंच गई थी। वहाँ एक दरार होने लगी। मानो धरती दो टुकड़ों में बँटने लगी हो। एक गड़गड़ाहट-सी गूँजने लगी और लकीर की सीध में धरती फटती ही जा रही थी। द्वीप के अंतिम सिरे तक तताँरा धरती को मानो क्रोध में काटता जा रहा था। सभी भयाकुल हो उठे। लोगों ने ऐसे दृश्य की कल्पना न की थी, वे सिहर उठे। उधर वामीरो फटती धरती के किनारे चीखती हुई दौड़ रही थी। तताँरा... तताँरा... तताँरा उसकी करुण पुकार मानो गड़गड़ाहट में दबती जा रही थी। दीप के अंतिम सिरे तक धरती को चीरता वह क्रुद्ध तताँरा उसकी एक तरफ़ था। दीप के अंतिम सिरे तक धरती को चीरता वह क्रुद्ध तताँरा उसकी एक तरफ़ था।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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पशु-पर्व |
पशुओं से संबंधित उत्सव |
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हृष्ट-पुष्ट |
स्वस्थ और मजबूत |
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प्रदर्शन |
दिखाना |
|
प्रतियोगिता |
मुकाबला |
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उत्सुकता |
मिलने की तीव्र इच्छा |
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तरल |
आँसुओं से भरी |
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विह्वल |
अत्यंत व्याकुल |
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किंकर्तव्यविमूढ़ |
क्या करना है, यह न समझ पाना |
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रुदन |
रोना |
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लाचारी |
असहायता |
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वेदना |
पीड़ा |
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अपमानित |
बेइज्जत |
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असहनीय |
जिसे सहन न किया जा सके |
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निषेध |
रोक |
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मूठ |
तलवार पकड़ने का हिस्सा |
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शमन |
शांत करना |
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गड़गड़ाहट |
तेज आवाज |
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दरार |
फटने से बनी लंबी जगह |
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भयाकुल |
बहुत डरा हुआ |
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करुण पुकार |
दुख भरी आवाज |
📌 प्रसंग
इस गद्यांश में पासा गाँव के पशु-पर्व, वामीरो और तताँरा के मिलन तथा गाँव वालों द्वारा उनके प्रेम का विरोध किए जाने के बाद उत्पन्न हुई दुखद घटना का वर्णन किया गया है।
📝 सरल अर्थ
पासा गाँव में पशु-पर्व आयोजित किया गया। इस अवसर पर पशुओं का प्रदर्शन, युवकों की शक्ति-परीक्षा, नृत्य, संगीत और भोजन आदि कार्यक्रम होते थे। सभी लोग उत्सव में शामिल थे, लेकिन तताँरा का मन इन कार्यक्रमों में नहीं था। वह वामीरो को खोज रहा था।
उसे नारियल के पेड़ों के पीछे वामीरो दिखाई दी। वह भयभीत थी और सामने आने में झिझक रही थी। तताँरा को देखते ही वह रोने लगी। तताँरा भी परेशान हो गया।
कुछ ही देर में गाँव के लोग वहाँ पहुँच गए। वामीरो की माँ ने तताँरा का अपमान किया और गाँव के अन्य लोग भी उसके विरोध में बोलने लगे।
तताँरा को सबसे अधिक क्रोध इस बात पर था कि सिर्फ अलग-अलग गाँव के होने के कारण उसके और वामीरो के प्रेम को स्वीकार नहीं किया जा रहा था।
क्रोध में उसने अपनी तलवार निकाल ली। उसकी तलवार में अद्भुत शक्ति थी। जब उसे कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने तलवार को अपनी ओर खींचा। इससे धरती फटने लगी और एक बड़ी दरार बनती चली गई।
लोग इस भयानक दृश्य को देखकर डर गए। वामीरो फटती धरती के किनारे तताँरा को पुकारते हुए दौड़ रही थी।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- पासा गाँव में पशु-पर्व का आयोजन हुआ।
- तताँरा का ध्यान केवल वामीरो को खोजने में था।
- वामीरो गाँव वालों और सामाजिक परंपरा के कारण दुखी थी।
- वामीरो की माँ ने तताँरा का अपमान किया।
- गाँव वालों ने भी उनके प्रेम का विरोध किया।
- तताँरा क्रोध में अपनी तलवार निकालता है।
- उसकी तलवार की शक्ति से धरती फटने लगती है।
- यह घटना आगे दो द्वीपों के अलग होने से जुड़ती है।
📜 गद्यांश–7
तताँरा-वामीरो की दुखद परिणति
मूल पाठ
जैसे ही होश आया, उसने देखा उसकी तरफ़ का दीप समुद्र में धँसने लगा है। वह हड़बड़ाने लगा उसने लपाती लगाकर दूसरा सिरा थामा चाहा किंतु पकड़ ढीली पड़ गई। वह नीचे की तरफ फिसलने लगा। वह तताँरा समुद्र की ओर बढ़ता जा रहा था और उसके पीछे से सिर्फ एक चीख उभरकर डूब रही थी, “वामीरो... वामीरो... वामीरो... वामीरो...” उधर वामीरो भी “तताँरा... तताँरा... ता... तौ... रा” पुकार रही थी।
तताँरा लहूलुहान हो चुका था। वह अचेत होने लगा और कुछ देर बाद उसे कोई होश नहीं रहा। वह कटे हुए द्वीप के अंतिम भूखंड पर पड़ा हुआ था जो कि दूसरे हिस्से से संयोगवश जुड़ा था। वह बहुत थका हुआ था, कहीं दूर में उसका जीवन बह रहा था। जब नहीं जानता उधर वामीरो पागल हो उठी। वह हर समय तताँरा को खोजती हुई उसी जगह पहुँचती और घंटों बैठी रहती। उसने खाना-पीना छोड़ दिया। परिवार से वह एक तरह विलग हो गई। लोगों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की किंतु कोई सुराग न मिला।
आज न तताँरा है न वामीरो किंतु उसकी यह प्रेमकथा घर-घर में सुनाई जाती है। निकोबारियों का मत है कि तताँरा की तलवार से कार-निकोबार को जो टुकड़े हुए, उनमें दूसरा लिटिल अंडमान है जो कार-निकोबार से आज 96 कि.मी. दूर स्थित है। निकोबारियों इस घटना के बाद दूसरे गाँवों में भी आपसी वैवाहिक संबंध करने लगे। तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु शायद इसी सुखद परिवर्तन के लिए थी।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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हड़बड़ाना |
घबरा जाना |
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फिसलना |
पकड़ छूटने पर नीचे जाना |
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चीख |
तेज आवाज में पुकार |
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लहूलुहान |
खून से घायल |
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अचेत |
बेहोश |
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भूखंड |
भूमि का टुकड़ा |
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संयोगवश |
अचानक/संयोग से |
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विलग |
अलग |
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सुराग |
पता/जानकारी |
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मत |
विचार/मान्यता |
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त्यागमयी |
त्याग से भरी |
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सुखद परिवर्तन |
अच्छा बदलाव |
📌 प्रसंग
यह पाठ के अंतिम भाग का गद्यांश है। इसमें तताँरा और वामीरो की दुखद मृत्यु तथा उनकी प्रेमकथा से निकोबारी समाज में आए परिवर्तन का वर्णन किया गया है।
📝 सरल अर्थ
धरती के दो भागों में बँट जाने के बाद तताँरा का हिस्सा समुद्र में धँसने लगा। वह उसे रोकने का प्रयास करता है, लेकिन उसकी पकड़ छूट जाती है। वह समुद्र की ओर फिसलने लगता है। दूसरी ओर वामीरो लगातार तताँरा को पुकार रही थी।
तताँरा गंभीर रूप से घायल हो चुका था और अंततः अचेत हो गया। वामीरो भी उसे खो देने के बाद बहुत दुखी हो गई। वह लगातार उसी स्थान पर जाकर बैठती और घंटों तताँरा की प्रतीक्षा करती। उसने खाना-पीना तक छोड़ दिया और परिवार से अलग-सी हो गई।
लोगों ने तताँरा को खोजने का प्रयास किया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
आज भी निकोबार में तताँरा-वामीरो की प्रेमकथा सुनाई जाती है। निकोबारियों की मान्यता है कि तताँरा की तलवार के कारण कार-निकोबार से अलग हुआ दूसरा भाग लिटिल अंडमान है।
इस घटना के बाद निकोबारी लोग दूसरे गाँवों में भी वैवाहिक संबंध बनाने लगे। इस प्रकार तताँरा और वामीरो का दुखद अंत एक सामाजिक परिवर्तन का कारण बना।
💡 महत्वपूर्ण बातें
1. तताँरा और वामीरो का प्रेम दुखद अंत तक पहुँचता है।
2. तताँरा गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो जाता है।
3. वामीरो उसे खोने के बाद अत्यंत दुखी हो जाती है।
4. वामीरो ने खाना-पीना तक छोड़ दिया।
5. उनकी प्रेमकथा आज भी निकोबारियों में सुनाई जाती है।
6. लोकमान्यता के अनुसार तताँरा की तलवार से द्वीप अलग हुए।
7. इस घटना के बाद अलग-अलग गाँवों में विवाह संबंध शुरू हुए।
8. उनकी मृत्यु सामाजिक रूढ़ि के विरुद्ध परिवर्तन का प्रतीक बन गई।
🌟 पाठ का केंद्रीय भाव
‘तताँरा-वामीरो कथा’ एक ऐसी लोककथा है जिसमें प्रेम, सामाजिक परंपरा, रूढ़ियों और परिवर्तन का सुंदर चित्रण मिलता है।
तताँरा और वामीरो एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन उनके समाज में अलग-अलग गाँवों के युवक-युवती का विवाह करना स्वीकार्य नहीं था। इस रूढ़ि के कारण उनका प्रेम दुखद परिणति तक पहुँचता है।
लेकिन उनकी प्रेमकथा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उनके त्याग के बाद समाज की पुरानी सोच में परिवर्तन आता है और अलग-अलग गाँवों के बीच वैवाहिक संबंधों की शुरुआत होती है।
⭐ पाठ का मुख्य संदेश
सच्चा प्रेम सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्ण परंपराओं से बड़ा होता है तथा कभी-कभी किसी व्यक्ति का त्याग पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का कारण बन सकता है।
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