निदा फ़ाज़ली — जीवन परिचय (Nida Fazli — Jeevan Parichay)
📖 निदा फ़ाज़ली — अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
(Nida Fazli - Ab Kaha Dusre ke Dukh Se Dukhi Hone Wale) Class 10 Hindi Sparsh
✍️ निदा फ़ाज़ली : जीवन-परिचय
12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में जन्मे निदा फ़ाज़ली का बचपन ग्वालियर में बीता। निदा फ़ाज़ली उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में और सरलता से किसी के भी दिलोदिमाग में घर कर सके, ऐसी कविता करने में इन्हें महारत हासिल है। वही निदा फ़ाज़ली अपनी गद्य रचनाओं में शेर-ओ-शायरी पिरोकर बहुत कुछ को थोड़े में कह देने के मामले में अपने किस्म के अकेले ही गद्यकार हैं।
निदा फ़ाज़ली की लफ़्ज़ों का पुल नामक कविता की पहली पुस्तक आई। शायरी की किताब खोया हुआ सा कुछ के लिए 1999 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित निदा फ़ाज़ली की आत्मकथा का पहला भाग दीवारों के बीच और दूसरा दीवारों के पार शीर्षक से प्रकाशित हो चुका है। फ़िल्म उद्योग से संबद्ध रहे निदा फ़ाज़ली का निधन 8 फ़रवरी 2016 को हुआ। यहाँ तमाशा मेरे आगे किताब में संकलित एक अंश प्रस्तुत है।
🔤 कठिन शब्दार्थ
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शब्द |
अर्थ |
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साठोत्तरी |
साठ के दशक के बाद की |
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महत्वपूर्ण |
विशेष रूप से प्रसिद्ध/प्रमुख |
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आम बोलचाल |
सामान्य बातचीत की भाषा |
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दिलोदिमाग |
मन और मस्तिष्क |
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महारत |
विशेष दक्षता |
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गद्य रचना |
गद्य में लिखी गई रचना |
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शेर-ओ-शायरी |
कविता/शायरी |
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गद्यकार |
गद्य लिखने वाला लेखक |
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लफ़्ज़ |
शब्द |
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आत्मकथा |
अपने जीवन की स्वयं लिखी कहानी |
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संबद्ध |
जुड़ा हुआ |
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संकलित |
संग्रहित |
📌 प्रसंग
प्रस्तुत अंश निदा फ़ाज़ली के जीवन-परिचय से संबंधित है। इसमें लेखक के जन्म, बचपन, साहित्यिक विशेषताओं, प्रमुख पुस्तकों, साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा उनके निधन के बारे में जानकारी दी गई है।
📝 सरल अर्थ
निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ, लेकिन उनका बचपन ग्वालियर में बीता। वे उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवियों में माने जाते हैं।
उनकी कविता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे बहुत सरल और आम बोलचाल की भाषा में ऐसी बातें कहते हैं जो सीधे पाठक के दिल और दिमाग पर प्रभाव डालती हैं। वे अपनी गद्य रचनाओं में भी शेर और शायरी का प्रयोग करते हुए कम शब्दों में बहुत अधिक बात कहने के लिए जाने जाते हैं।
उनकी कविता की पहली पुस्तक ‘लफ़्ज़ों का पुल’ थी। उनकी शायरी की पुस्तक ‘खोया हुआ सा कुछ’ के लिए उन्हें 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी आत्मकथा दो भागों—‘दीवारों के बीच’ और ‘दीवारों के पार’—में प्रकाशित हुई।
निदा फ़ाज़ली फ़िल्म उद्योग से भी जुड़े रहे। उनका निधन 8 फ़रवरी 2016 को हुआ। प्रस्तुत पाठ उनके ‘तमाशा मेरे आगे’ नामक पुस्तक में संकलित एक अंश पर आधारित है।
💡 महत्वपूर्ण बातें
- जन्म: 12 अक्टूबर 1938, दिल्ली
- बचपन: ग्वालियर में बीता
- भाषा: उर्दू
- साहित्यिक पहचान: महत्वपूर्ण कवि और गद्यकार
- कविता की विशेषता: सरल और आम बोलचाल की भाषा
- पहली कविता-पुस्तक: ‘लफ़्ज़ों का पुल’
- साहित्य अकादेमी पुरस्कार: 1999
- पुरस्कार प्राप्त पुस्तक: ‘खोया हुआ सा कुछ’
- आत्मकथा: ‘दीवारों के बीच’ और ‘दीवारों के पार’
- फ़िल्म उद्योग से संबंध: हाँ
- निधन: 8 फ़रवरी 2016
- पाठ का स्रोत: ‘तमाशा मेरे आगे’
🎯 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1. निदा फ़ाज़ली का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ।
प्रश्न 2. निदा फ़ाज़ली का बचपन कहाँ बीता?
उत्तर: उनका बचपन ग्वालियर में बीता।
प्रश्न 3. निदा फ़ाज़ली को 1999 में किस पुस्तक के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला?
उत्तर: उन्हें उनकी शायरी की पुस्तक ‘खोया हुआ सा कुछ’ के लिए 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
प्रश्न 4. निदा फ़ाज़ली की आत्मकथा किन दो भागों में प्रकाशित हुई?
उत्तर: उनकी आत्मकथा ‘दीवारों के बीच’ और ‘दीवारों के पार’ नामक दो भागों में प्रकाशित हुई।
प्रश्न 5. प्रस्तुत पाठ किस पुस्तक से लिया गया है?
उत्तर: प्रस्तुत अंश ‘तमाशा मेरे आगे’ नामक पुस्तक में संकलित है।
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